Tuesday, 17 December 2019

Being Single



सबसे पहले अपना करियर बनाये


ये उनके लिये जो सोचते है कि उन्हें प्यार है
 मगर हकीकत में ये आपके दिमाग का कमाल है।
आप भी सोचते होंगे अपनी ज़िंदगी को एक गुलाब की तरह कोई मिल जाये।
फिर इसी की खोज में आप दिन रात कुछ ना देखकर सिर्फ उसकी ही तलाश में लग जाते है।
अपना हर एक समय सिर्फ उसी की तलाश में लगा देते हो।
Fb insta पर अपने कास्ट(जाती) और मनचाही लड़की/लड़के को खोजना शुरू कर देते हो।
बिना जान पहचान के request भी सेंड कर देते हो।
और फिर खुद ही शुरू करते हो अपनी बर्बादी का समय!!

लेकिन बर्बादी?? ऐसा क्यों?
बिना जान पहचान के किसी को परेशान करना ये तो कोई अच्छी बात नहीं।
बिना सोचे समझे दुसरो की कही बातों में आकर खुद के लिए भी GF/BF ढूढ़ना ये तो समय का सदुपयोग नहीं।
ये है बर्बादी!!

अरे दुसरो ने अपनी love life के बारे में जो बताया हो उन्हें याद करके क्यों अपना दिल जलाते हो।
कभी किसी से जलना,ये तो कोई अच्छी बात नहीं।

वो अगर खुश है अपने love में तो उनको रहने दो।
तुम बस ये सोचकर खुश रहो
की
😍अभी तुम सिंगल हो ❤️
अपनी कामयाबी के खुद अकेले ही हकदार हो।🥇
जानू,बाबू,शोना इन सभी से कुछ नही मिलने वाला❌
अगर लाइफ को अच्छा बनाना है तो सबसे पहले
किताब को उठाना है।

एक बार सरकारी नौकरी ले लो,एक बार अपनी ड्रीम जॉब पा लो।
फिर love इतना मिलेगा की तुम खुद उससे दूर भागने लगोगे।
बस यही सोचो की अगर में 🤔अभी किताब से love कर लिया तो फिर किसी और के love की कोई ज़रूरत भी नही पड़ेगी।☺️

Physical Attrection को प्यार मत समझ बैठना
अक्सर जवानी में कदम डगमगा जाते है।
सिर्फ पढ़ाई से मतलब रखो
क्योंकि सच्चा प्यार अब सफेद शेरों की तरह है जो खूबसूरत तो बहुत है मगर मिलता बहुत ही कम।
🙏

आखिर में बस इतना ही कहूँगा।
की सबसे पहली वरीयता(priority) खुद के सपने को दो।

बाकी सब झक मार के मिल ही जायेगा
जब तुम खुद के सपने को पा लोगे।
जय हिन्द।

Saturday, 2 November 2019


कुछ लोग दियो से तेल बटोरती बच्ची के फोटो को चिपका चिपका कर ज्ञान बाट रहे है,उन लोगो को बताना चाहता हु, ये बच्ची इसी लिए दीपक से तेल भर पा रही है क्योंकि त्योहार हिन्दू का है, ये बेटी मन्दिर की बजाय कही और त्योहार पर कुछ बटोरने जाती तो क्या मिलता सब जानते है,ये वहां से कुछ हासिल ही कर लेती वो भी गनीमत थी। पंछी हो या गरीब की बेटी उसे अपेक्षा मन्दिर की चौखट से ही है और कही जाने की सोचते तक नही पंछी या बेटी दोनो को शिकार होने का डर रहता है।
हिन्दू ही वो धर्म है जो चींटी से लगाकर हाथी ओर कन्या से लगाकर दरिद्रनारायण की सेवा करता है।
अतः है  हो सके तो अपने गांजे दारू चरस सैफई डांस रीचार्ज जैसे फालतू खर्चो से पैसे बचाकर किसी गरीब को देने की कोशिश करो पर बदले में जहर भरने की शर्त के बिना।
हिन्दू त्योहार गरीब के प्रकृति के समाज के सबके हित मे होते है, बाकी त्योहार तो बाजारों में तनाव उपद्रव पैदा करते है, अतः जरा उधर नजर घुआओ ओर बकरे और फालतू के पैसो से गरीब के घर का चूल्हा जलाने की हिम्मत करो ,मुझे पता है तुम नही करोगे क्योंकि तुम्हरा उद्देश्य गरीबी मिटाना नहीं बल्कि हिन्दू ओर हिन्दू त्योहारों को टार्गेट करना है।
तुम्हे बर्बाद होता पैसा दिल्ली की लेज़र लाइट दीवाली उत्सव, सैफई नंगा नाच, बर्बर टीपू जयंति जैसे जगह पर नही दिखाई देता या तब मुँह में दही जम जाता है ,लाखो करोड़ो रूपया बहा दिया जाता है जिससे होता कुछ नही।
न गरीब के पल्ले पड़ता और न कुछ हासिल ही होता सिवाए ये दिखाने के की हम सेक्युलर है।
अतः गटर में लोटते सुवरो से निवेदन है कि एक दियो में 2 रु का तेल आता है जिसमे दिया बनाने वाले से लेकर, किसान की ऊन तक का दाम दिया जाता है।
सैफई डांस, से ज्यादा गरीबी मिट सकती है उस पर वामपंथी ज्ञानी कुकुर जरूर चिंतन करे।
भगवान खुद बिक जाते है बाजार में गरीब का पेट भरने के लिए ,वही दूसरी तरफ शान में गुस्ताख़ी पर गर्दन कट जाती है।
सनातन धर्म की जय🚩

Thursday, 26 September 2019

मैं एक सनातनी हूँ, सनातन मेरा धर्म, सनातनी मेरी राष्ट्रीयता।
मेरा राष्ट्रीय ध्वज है क्षात्र, ब्रह्म, शुद्र एवं वैश्य तेज युक्त वह भगवा ध्वज जिसे कभी सम्राट विक्रमादित्य ने हिन्दुकुश से लेकर अरब भूमि पर लहराया था।
"धर्म रक्षक"

मेरी राष्ट्रीयता मेरे धर्म  से जुडी है क्योंकि राष्ट्र तो बनते है बिगड़ते है। अखंड होते है, खंडित होते है पर मूल राष्ट्रीयता तो वह संस्कृति है जो इस महान अपराजेय व कालजयी सनातन धर्म से मिली है।
मेरे आदर्श मेरे नायक तो सनातन धर्म पताका को विश्व में फहराने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, योगेश्वर श्री कृष्ण, महाऋषि गौतम, चरक, पाणिनि, जैमिनी, कणाद, चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य, आदि गुरु शंकराचार्य, कुमारिल भट्ट, आचार्य चाणक्य, चंद्रगुप्त मौर्य, पुष्यमित्र शुंग, शिवजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविन्द सिंह, स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष व युगपुरोधा है।
इस धर्म के सिद्धांतों आदर्शों ने ही इस मातृभूमि को संस्कृति के सर्वोच्च सिंहासन पर बिठाया था।
यदि ये धर्म न हो तो राष्ट्रीयता का कैसा बोध ?
धर्म नहीं रहेगा तो मैं भी इस राष्ट्र को मातृभूमि न मान कर साधारण भूमि मानूँगा। अतः मेरे लिए मेरा धर्म सर्वोच्च है।
धर्म रहा तो इस पृथ्वी पर कही न कही राष्ट्र बन जाएगा। नाम भी भारत वर्ष या आर्यावर्त रख लेंगे। पर धर्म न बचा तो राष्ट्र का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा।
इसलिए हमारे पूर्वजों ने धर्म को आधार बना कर इस राष्ट्र का निर्माण किया।
जो कभी जम्बूद्वीप एशिया में फैला था। धर्म की सीमाएं सिमटी तो राष्ट्र भी आर्यावर्त (ईरान से इंडोनेशिया व मॉरीशस से मास्को) तक सिमट गया।
धर्म और संकुचित हुआ तो आज का भारत रह गया। सनातन धर्म सिमटता गया और राष्ट्र भी खंड खंड में खण्डित होता गया।
जो पाकिस्तान व बंगलादेश कभी हमारा भाग था वह आज खंडित हो गया क्योंकि वहाँ से धर्म लुप्त हुआ और राष्ट्रीयता का बोध समाप्त हो गया।
वर्तमान के राजनेताओं ने धर्म के स्थान पर राष्ट्र को प्रमुखता दी।
धर्मविहीन राष्ट्र कैसा होता है ???
ये आज के राष्ट्र को देखकर जान सकते हैं।
पहले न कोई निर्धन था यदि था तो मन में संतोष था।
धनी व्यक्ति दयालू तथा दानी प्रवृत्ति के थे। मन में न लोभ मोह था न ईर्ष्या एवं धर्म के प्रसार के कारण राष्ट्रीयता का भी बोध था।
इतनी निष्ठा उस समय चोरों में भी होती थी। आज वह निष्ठा समाज के रक्षकों से भी लुप्त हो गई क्योंकि धर्म नहीं रहा।
आज अधर्म फैला हुआ है इसलिए समाज में भी असंतोष भय निराशा का बोध है।
राष्ट्रीयता लुप्त है या किसी विशेष अवसर पर ही राष्ट्रभक्ति का बोध होता है।
ऐसे में यदि खंड खंड हो चुके राष्ट्र को बचाना है तो माध्यम धर्म को बनाना होगा।
जब धर्म व संस्कृति बचेगी तो ही ये राष्ट्र भी बचेगा।
अतः धर्म सर्वोपरि है, सनातन संस्कृति ही राष्ट्र का उद्धार करने की क्षमता रखती है।

धर्म की जय हो,
अधर्म का नाश हो,
प्राणियों में सद्भावना हो,
विश्व का कल्याण हो,
हर हर महादेव।

🔱🚩 जय हिन्दुत्व 🚩🔱

Monday, 23 September 2019

          सच की मजबूरी नहीं होती कि वो सबको कुछ खुश करता फिरे!

ट्रम्प ने Radical Islamic Terrorism से लड़ने की बात बोलने के बाद लंबा Pause दिया। उनके इस Pause के बाद भीड़ ने भी खड़े होकर तालियां बजाईं। मोदी सहित वहां मौजूद बाकी भारतीय अधिकारी भी खड़े हो गए। ट्रम्प ने Pause इसलिए दिया क्योंकि वो अपनी बात का असर देखना चाहते थे। Pause देकर वो एक ख़ास संदेश देना चाहते थे। Pause देकर उन्होंने ये भी जता दिया कि आखिर मैंने वो बोल दिया जो बहुत से लोग बोलने से बचते हैं। 

राष्ट्रपति बनने से तकरीबन 30 साल पहले ट्रम्प से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि आपको क्यों लगता है कि आप देश के राष्ट्रपति बन सकते हैं, तो उनका जवाब था, क्योंकि मैं Politically Incorrect हूं। मतलब मैं हमेशा वो बात नहीं बोलता जो 'आदर्श रूप' में बोलनी जानी चाहिए, बल्कि मैं वो बोलता हूं जिसे लोग सच मानते हैं, मगर मुख्यधारा (राजनीति और मीडिया) जिसके बारे में कभी बात नहीं करती। ट्रम्प के ये तेवर ही आज उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। इन्हीं तेवरों ने उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति बनाया। 

मगर भारत में सच को सच बोलना तो दूर इतने सालों तक हम उसे सच मानने को ही तैयार नहीं थे। उस मुख्यधारा ने कभी माना ही नहीं आतंकवाद को कोई धर्म हो सकता है। किसी खास तरह की मानसिकता आतंकवाद को बढ़ावा दे सकती है। और मोदी की जिस राजनीति को आज भी देश का एक वर्ग (राजनीति और वामपंथी मीडिया) गलत मानती है वो इसलिए लोकप्रिय हुई, क्योंकि उसने उस झूठ को सच मानने से इंकार कर दिया। 

उन्होंने ट्रम्प की तरह खुले शब्दों में भले न बोला हो लेकिन उसकी तरफ इशारा ज़रूर कर दिया। वो इशारा जिसे बहुत से लोग साम्प्रदायिक राजनीति कहते हैं। क्योंकि उनके हिसाब से जो धर्मनिरपेक्ष राजनीति है उसमें किसी को बुरा नहीं कहा जाता। हमेशा यही बोला जाता है कि सभी अच्छे हैं। हज़ारों सालों से गंगा-जमनी तहज़ीब है, कोई भी धर्म नफरत नहीं सिखाता, जैसी मीठी-मीठी बातें बोली जाती हैं। उन्हें लगता है कि किसी को भी ऐसा सच बोलने से परहेज़ करना चाहिए या उसे इग्नोर करना चाहिए जिससे कोई खास पक्ष शर्मिंदा हो। भले उसने उस शर्मिंदगी से बचने के लिए आज तक कुछ भी क्यों न किया हो। 

यही वो सोच है जो मानती है कि धर्मनिपरेक्षा की रक्षा में आप बहुसंख्यक को कुछ भी कह सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे गली के झगड़े में कोई महिला झूठा बड़प्पन दिखाने के लिए हर बार अपने ही बच्चे को डांट देती हो। महिला को लगता है कि उसके ऐसा करने से लगेगा कि देखा, वो बाकी माओं की तरह नहीं है। लोगों के ऐसा सोचने से महिला को सम्मान मिलेगा। और अगर वो कभी अपने बच्चे को सच मानकर उसका पक्ष लेगी तो लोग उसे भी बाकी महिलाओं की तरह आम और झगड़ालू मान लेंगे। 

महिला की तरह सम्मान की उस भूख ने कई सालों तक इस देश के मीडिया और राजनीतिक वो वैसा ही मक्कार बना दिया था। मगर देश की जनता उस बच्चे जितनी बदनसीब नहीं थी। बच्चा मां नहीं बदल सकता मगर जनता सत्ता बदल सकती है। जब वो जनता हद से ज़्यादा मजबूर हो गई। उसे विकल्प मिला, तो उसने सत्ता बदल दी। ये वो जनता थी जिसके अंदर सालों से पीड़ित होने के बावजूद छले जाने की पीड़ा थी। खुद को अकेला महसूस करने का दर्द था।

एक नेता को सफल या महान बनने के लिए कई पैमानों पर कामयाब होना पड़ता है। मोदी कई पैमानों पर खरे उतरे हैं और कईयों पर फेल भी हुए हैं। मगर ये एक पैमाना ऐसा है जिस पर बिना किसी शक ओ शुबाह के वो बेहद कामयाब हैं। उनके आने से उस पीड़ित जानता को तसल्ली मिली है। भले ही उनको पसंद न करने वाले लोग डिनायल मोड में जीते रहें मगर वो हर बदलते दिन के साथ ज्यादा लोकप्रिय और मज़बूत होते जा रहे हैं। 

वो मज़बूत हो रहे हैं क्योंकि आडवाणी की तरह उन्होंने कभी परवाह नहीं की कि मुझे भी Politically Correct होना है। जिन्ना को सबसे बड़ा देशभक्त बताकर कोई मिडिल पाथ चुनना है। क्योंकि उन्होंने माना, सच हमेशा लोकप्रिय नहीं होता। वो हमेशा बड़प्पन लिए नहीं आता। वो हमेशा मुंह का मीठा नहीं होता। सच हमेशा सच होता है और उसकी ऐसी कोई मजबूरी नहीं कि वो हर किसी को खुश करता फिरे।


Monday, 16 September 2019

सभी आदरणीय मित्रों को जय श्री राम 8 दिन की तपस्या साधना में आर एस एस के प्राथमिक वर्ग 2019 में सम्मिलित हुआ ,इस कारण से मोबाइल नेटवर्क सोशल मीडिया घर परिवार से दूर तपस्या में था ,इस कारण सोशल मीडिया में संपर्क में नहीं था इन 8 दिनों में मैंने आर॰एस॰एस॰. को बहुत करीब से जाना सुप्रभात में समय से जगना नियमित दिनचर्या, नियमित अनुशासन ,बहुत ही बड़े विद्वानों का बौद्धिक प्राप्त हुआ ,बहुत सारी जानकारियां प्राप्त किया, मैं पूरी कोशिश करूंगा ,की इन 8 दिनों की तपस्या में जो मैंने सीखा है ,वह अपने समाज के लिए, अपने राष्ट्र के लिए ,अपने देश के लिए समर्पित रहूंगा ,और समाज और जातिवाद के टुकडे मे अलग-थलग  हुए लोगों को एक करूंगा और कोशिश करूंगा कि मेरे राष्ट्र के लिए मुझसे जो भी बन सकता है जो कुछ मैंने सीखा है उस ज्ञान को आगे बढ़ा कर और उन नियमों का पालन करूंगा जो मुझे सिखाया गया है।
प्रशिक्षण वर्ग का स्वयंसेवक तथा संगठन दोनों को लाभ होता है। वर्ग में आकर शिक्षार्थी पूरी तरह से संघ के वातावरण में डूब जाता है। संघ के प्रान्त से लेकर केन्द्रीय स्तर के वरिष्ठ कार्यकर्ता वहां उपलब्ध रहते हैं। वे सब भी वहीं रहते, खाते और अन्य गतिविधियों में शामिल होते हैं। उनके साथ औपचारिक तथा अनौपचारिक बातचीत में शिक्षार्थी की संघ संबंधी जानकारी बढ़ती है। उसके मन की जिज्ञासाओं का समाधान होता है। जो सदा उसके जीवन में लाभ देती है।
इसके साथ ही प्रत्येक स्वयंसेवक में कुछ प्रतिभा छिपी रहती है। कोई अच्छा वक्ता हो सकता है, तो कोई लेखक। कोई अच्छा गायक हो सकता है, तो कोई खिलाड़ी। किसी में तर्कशक्ति प्रबल होती है, तो किसी में श्रद्धा और समर्पण। वर्ग के कार्यक्रमों में उसकी यह प्रतिभा प्रकट होती है। अनुभवी कार्यकर्ता इसे पहचानकर उसे विकसित करने का प्रयास करते हैं। इसका लाभ स्वयंसेवक को जीवन भर होता है।
वर्ग में स्वयंसेवक की शारीरिक और मानसिक क्षमता बढ़ती है। इसका लाभ वर्ग के बाद उसकी शाखा को मिलता है। इससे शाखा की गुणवत्ता बढ़ती है तथा नये स्थानों पर शाखाओं का विस्तार होता है। वर्ग में सब एक साथ रहते, खेलते और खाते-पीते हैं। पड़ोसी स्वयंसेवक किस जाति और क्षेत्र का है, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। वह किसान है या मजदूर, वकील है या डाक्टर, छात्र है या व्यापारी, नौकरी करता है या बेरोजगार, धनी है या निर्धन, शिक्षित है या अशिक्षित, ये सब बातें गौण हो जाती हैं। सबके मन में यही भाव रहता है कि स्वयंसेवक होने के नाते हम सब भाई हैं। भारत माता हम सबकी माता है।
वर्ग के अनुशासन और दिनचर्या का स्वयंसेवक के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। घर में वह अपने मन से सोता, जागता, खाता और रहता है; पर वर्ग में वह धरती पर अपना बिस्तर लगाकर सबके साथ रहता है। प्रातः चार बजे से रात दस बजे तक की कठिन दिनचर्या का पालन करता है। अपने बर्तन और कपड़े स्वयं धोता है। भोजन अति साधारण और निश्चित समय पर होता है। वर्ग में प्रत्येक शिक्षार्थी को अपनी बारी आने पर भोजन वितरण भी करना होता है। इस प्रकार उनमें स्वावलम्बन की भावना का विकास होता है। इससे स्वयंसेवक जीवन के किसी क्षेत्र में कभी मार नहीं खाता।
इसे पढ़कर शायद कुछ लोगों को लगे कि ये व्यवस्थाएं संघ के खर्चे से होती हैं ? जी नहीं। इसके लिए हर शिक्षार्थी से शुल्क लिया जाता है। अपने साबुन, तेल, मंजन आदि का प्रबंध भी शिक्षार्थी स्वयं ही करते हैं। वर्ग की व्यवस्था संभालने के लिए बड़ी संख्या में अनुभवी कार्यकर्ता भी वहां रहते हैं। उनमें से अधिकांश शारीरिक और बौद्धिक शिक्षण की व्यवस्था देखते हैं, जबकि बुजुर्ग कार्यकर्ता भोजनालय, जल, चिकित्सा, यातायात, कार्यालय आदि की चिन्ता करते हैं। ये सब भी अपना शुल्क देते हैं।
ग्रीष्मावकाश में ऐसे वर्ग कुछ अन्य संस्थाएं भी आयोजित करती हैं; पर वे सरकारी पैसे से पिकनिक का साधन मात्र बनकर रह जाते हैं। इनमें भाग लेने वालों का उद्देश्य जैसे-तैसे कुछ प्रमाण पत्र पाना ही होता है, जिससे भविष्य में नौकरी या पदोन्नति आदि में सहायता मिल सके। जबकि संघ के प्रशिक्षण वर्गों में शिक्षार्थी यह सोचकर आता है कि उसे अपने क्षेत्र की शाखा को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण लेना है। इसलिए वह पूर्ण मनोयोग से प्रत्येक कार्यक्रम में भाग लेता है। वह किसी के दबाव या लालच से नहीं, अपितु अपनी इच्छा से वर्ग में आता है। इसलिए अन्य संस्थाओं के वर्गों में जहां उच्छृंखलता व्याप्त रहती है, वहां संघ के प्रशिक्षण वर्ग में चारों ओर प्रेम और अनुशासन की गंगा बहती दिखायी देती है।
जिस स्थान पर वर्ग लगते हैं, वहां की शाखा और कार्यकर्ताओं को भी इससे लाभ होता है। वर्ग के लिए कई तरह की व्यवस्थाएं करनी होती हैं। समाज के प्रभावी लोगों तथा संस्थाओं से सम्पर्क कर वर्ग के लिए साधन जुटाने होते हैं। अतः निष्क्रिय कार्यकर्ता भी सक्रिय हो जाते हैं। स्थानीय कार्यकर्ता नये-नये लोगों को वर्ग दिखाने के लिए लाते हैं। इससे वे भी संघ से जुड़ते हैं। वर्ग के दौरान पथ-संचलन तथा सार्वजनिक समापन कार्यक्रम से स्थानीय हिन्दू समाज में उत्साह का निर्माण होता है।
इस प्रकार संघ शिक्षा वर्ग न केवल शिक्षार्थियों, अपितु व्यवस्थापकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए भी वरदान बनकर आता है।

Thursday, 5 September 2019

ये GDP क्या बला है ??

100%सच
श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान के कुछ अंश

जब आप टूथपेस्ट खरीदते हैं तो GDP बढ़ती है परंतु किसी गरीब से दातुन खरीदते हैं तो GDP नहीं बढ़ती।
100% सच-
जब आप किसी बड़े होस्पीटल मे जाकर 500 रुपे की दवाई खरीदते हैं तो GDP बढ़ती है परंतु आप अपने घर मे उत्पन्न गिलोय नीम या गोमूत्र से अपना इलाज करते हैं तो जीडीपी नहीं बढ़ती।
100% सच
जब आप घर मे गाय पालकर दूध पीते हैं तो GDP नहीं बढ़ती परंतु पैकिंग का मिलावट वाला दूध पीते हैं तो GDP बढ़ती है।
100% सच
जब आप अपने घर मे सब्जिया उगा कर खाते हैं तो GDP नहीं बढ़ती परंतु जब किसी बड़े AC माल मे जाकर 10 दिन की बासी सब्जी खरीदते हैं तो GDP बढ़ती है।
100% सच
जब आप गाय माता की सेवा करते हैं तो GDP नहीं बढ़ती परंतु जब कसाई उसी गाय को काट कर चमड़ा मांस बेचते हैं तो GDP बढ़ती है।
रोजाना अखबार लिखा होता है कि भारत की जीडीपी 8 .7 % है कभी कहा जाता है के 9 % है ; प्रधानमंत्री कहते है की हम 12 % जीडीपी हासिल कर सकते है पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलम कहते थे की हम 14 % भी कर सकते है , रोजाना आप जीडीपी के बारे में पड़ते है और आपको लगता है की जीडीपी जितनी बड़े उतनी देश की तरक्की होगी ।
कभी किसी ने जानने की कौशिश की है कि ये जीडीपी है क्या ?
आम आदमी की भाषा में जीडीपी का क्या मतलब है ये हमें आज तक किसी ने नही समझाया । GDP actually the amount of money that exchanges hand . माने जो पैसा आप आदान प्रदान करते है लिखित में वो अगर हम जोड़ ले तो जीडीपी बनती है ।
अगर एक पेड़ खड़ा है तो जीडीपी नही बढती , लेकिन अगर आप उस पेड़ को काट देते है तो जीडीपी बढती है किउंकि पेड़ को काटने के बाद पैसा आदान प्रदान होता है , पर पेड़ अगर खड़ा है तो तो कोई इकनोमिक activity नही होती जीडीपी भी नही बढती ।
अगर भारत की सारे पेड़ काट दिया जाये तो भारत की जीडीपी 27 % हो जाएगी जो आज करीब 7 % है । आप बताइए आपको 27 % जीडीपी चाहिए या नही !
अगर नदी साफ़ बह रही है तो जीडीपी नही बढती पर अगर आप नदी को गंध करते है तो जीडीपी तीन बार बढती है । पहले नदी पास उद्योग लगाने से जीडीपी बढ गयी, फिर नदी को साफ़ करने के लिए हज़ार करोड़ का प्रोजेक्ट लेके ए जीडीपी फिर बढ गयी , फिर लोगो ने नदी के दूषित पानी का इस्तेमाल किया बीमार पड़े, डॉक्टर के पास गए डॉक्टर ने फीस ली , फिर जीडीपी बढ गयी ।
अगर आप कोई कार खरीदते है , आपने पैसा दिया किसी ने पैसा लिया तो जीडीपी बढ गयी, आपने कार को चलाने के लिए पेट्रोल ख़रीदा जीडीपी फिर बढ गयी, कार के दूषित धुआँ से आप बीमार हुए , आप डॉक्टर के पास गए , आपने फीस दी उसने फीस ली और फिर जीडीपी बढ गयी ।
जितनी कारे आयेगी देश में उतनी जीडीपी तीन बार बढ जाएगी और इस देश रोजाना 4000 ज्यदा कारे खरीदी जाती है , 25000 से ज्यादा मोटर साइकल खरीदी जाती है और सरकार भी इसकी तरफ जोर देती है क्योंकि येही एक तरीका है के देश की जीडीपी बढ़े।
हर बड़े अख़बार में कोका कोला और पेप्सी कोला का advertisement आता है और ये भी सब जानते है के ये कितने खतरनाक और जहरीला है सेहत के लिए पर फिर भी सब सरकारे चुप है और आँखे बंध करके रखा है क्योंकि जब भी आप कोका कोला पीते है देश की जीडीपी दो बार बढती है । पहले आप कोका कोला ख़रीदा पैसे दिया जीडीपी बढ गया , फिर पिने के बाद बीमार पड़े डॉक्टर के पास गए, डॉक्टर को फीस दिया जीडीपी बढ गयी ।
 इस मायाजाल को समझे ।

Tuesday, 27 August 2019


                                               मंदी मंदी मंदी                                               



मंदी का राग ही अलापा इसलिए जा रहा है, ताकि पाकिस्तान को पीओके बचाने का कवर दिया जा सके!!

मान भी लिया अगर आज मंदी है, तो कल तक तुमने जो कमाया वो कहाँ है?
जरूरत के दिनों के लिए तो तृतीय वर्ग के कर्मचारी भी बचत करके रखते हैं, तो ये बड़ी बड़ी कंपनियां नही करती होंगी?

फायदा हो तो अपना, धंधा मंदा हो तो कर्मचारियों पे तलवार लटकाओ और सरकार बेल आउट पैकेज दे!!
बड़ा गजब का लॉजिक है!!

इधर सरकार पीओके खाली करवाना शुरू करेगी,
उधर लिबरल गैंग और पाकिस्तान का स्लीपर सेल मंदी मंदी का राग अलापेंगे और लोगो को बहकाने की कोशिश करेंगे मंदी के दौर में ये फैसला देश को गर्त में ले जाएगा टाइप माहौल बनाने की भरसक कोशिश की जाएगी!!

हम महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और पृथ्वीराज चौहान जी के वंशज हैं, एक टाइम का खाना खाकर जीवन यापन कर सकते हैं लेकिन स्वाभिमान से ही जीएंगे..!!

सांप और सपोलो की पहचान करना शुरू करिये, और इनको कुचलने को तैयार रहिए, अभी सबको बहुत मेहनत करनी है..!!

Friday, 26 July 2019

ढोल गवार शुद्र पशु नारी
सकल ताड़ना के अधिकारी

कुछ लोग इस चौपाई का अपनी बुद्धि और अतिज्ञान के अनुसार ….. विपरीत अर्थ निकालकर तुलसी दास जी और रामचरित मानस पर आक्षेप लगाते हुए अक्सर दिख जाते है….!

यह बेहद ही सामान्य समझ की बात है कि….. अगर तुलसी दास जी स्त्रियो से द्वेष या घृणा करते तो…….

रामचरित मानस में उन्होने स्त्री को देवी समान क्यो बताया…?????

और तो और…. तुलसीदास जी ने तो …

“एक नारिब्रतरत सब झारी। ते मन बच क्रम पतिहितकारी।“
अर्थात, पुरुष के विशेषाधिकारों को न मानकर……… दोनों को समान रूप से एक ही व्रत पालने का आदेश दिया है।

साथ ही …..सीता जी की परम आदर्शवादी महिला एवं उनकी नैतिकता का चित्रण….उर्मिला के विरह और त्याग का चित्रण……. यहाँ तक कि…. लंका से मंदोदरी और त्रिजटा का चित्रण भी सकारात्मक ही है ….!

सिर्फ इतना ही नहीं….. सुरसा जैसी राक्षसी को भी हनुमान द्वारा माता कहना…….. कैकेई और मंथरा भी तब सहानुभूति का पात्र हो जाती हैं….. जब, उन्हे अपनी ग़लती का पश्चाताप होता है ।

ऐसे में तुलसीदास जी के शब्द का अर्थ……… स्त्री को पीटना अथवा प्रताड़ित करना है……..आसानी से हजम नहीं होता…..!

साथ ही … इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक है कि…. तुलसी दास जी…… शूद्रो के विषय मे तो कदापि ऐसा लिख ही नहीं सकते क्योंकि…. उनके प्रिय राम द्वारा शबरी…..विषाद….केवट आदि से मिलन के जो उदाहरण है…… वो तो और कुछ ही दर्शाते है ……!

तुलसी दास जीने मानस की रचना अवधी में की है और प्रचलित शब्द ज़्यादा आए हैं, इसलिए “ताड़न” शब्द को संस्कृत से ही जोड़कर नहीं देखा जा सकता…..!

फिर, यह प्रश्न बहुत स्वाभिविक सा है कि…. आखिर इसका भावार्थ है क्या….?????

इसे ठीक से समझाने के लिए…… मैं आप लोगों को एक “”” शब्दों के हेर-फेर से….. वाक्य के भावार्थ बदल जाने का एक उदाहरण देना चाहूँगा …..

मान ले कि ……

एक वाक्य है…… “”” बच्चों को कमरे में बंद रखा गया है “”

दूसरा वाक्य …. “” बच्चों को कमरे में बन्दर खा गया है “”

हालाँकि…. दोनों वाक्यों में … अक्षर हुबहू वही हैं….. लेकिन…. दोनों वाक्यों के भावार्थ पूरी तरह बदल चुके हैं…!

ठीक ऐसा ही रामचरित मानस की इस चौपाई के साथ हुआ है…..

यह ध्यान योग्य बात है कि…. क्षुद्र मानसिकता से ग्रस्त ऐसे लोगो को…….. निंदा के लिए ऐसी पंक्तियाँ दिख जाती है …. परन्तु उन्हें यह नहीं दिखता है कि ….. राजा दशरथ ने स्त्री के वचनो के कारण ही तो अपने प्राण दे दिये….

और श्री राम ने स्त्री की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया ….

साथ ही ….रामायण के प्रत्येक पात्र द्वारा…. पूरी रामायण मे स्त्रियो का सम्मान किया गया और उन्हें देवी बताया गया ..!

असल में ये चौपाइयां उस समय कही गई है जब … समुन्द्र द्वारा श्री राम की विनय स्वीकार न करने पर जब श्री राम क्रोधित हो गए…….. और अपने तरकश से बाण निकाला …!

तब समुद्र देव …. श्री राम के चरणो मे आए…. और, श्री राम से क्षमा मांगते हुये अनुनय करते हुए कहने लगे कि….

– हे प्रभु – आपने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा दी….. और ये ये लोग विशेष ध्यान रखने यानि …..शिक्षा देने के योग्य होते है …. !

दरअसल….. ताड़ना एक अवधी शब्द है……. जिसका अर्थ …. पहचानना .. परखना या रेकी करना होता है…..!

तुलसीदास जी… के कहने का मंतव्य यह है कि….. अगर हम ढोल के व्यवहार (सुर) को नहीं पहचानते ….तो, उसे बजाते समय उसकी आवाज कर्कश होगी …..अतः उससे स्वभाव को जानना आवश्यक है ।

इसी तरह गंवार का अर्थ …..किसी का मजाक उड़ाना नहीं …..बल्कि, उनसे है जो अज्ञानी हैं… और प्रकृति या व्यवहार को जाने बिना उसके साथ जीवन सही से नहीं बिताया जा सकता …..।

इसी तरह पशु और नारी के परिप्रेक्ष में भी वही अर्थ है कि….. जब तक हम नारी के स्वभाव को नहीं पहचानते ….. उसके साथ जीवन का निर्वाह अच्छी तरह और सुखपूर्वक नहीं हो सकता…।

इसका सीधा सा भावार्थ यह है कि….. ढोल, गंवार, शूद्र, पशु …. और नारी…. के व्यवहार को ठीक से समझना चाहिए …. और उनके किसी भी बात का बुरा नहीं मानना चाहिए….!

और तुलसीदास जी के इस चौपाई को लोग अपने जीवन में भी उतारते हैं……. परन्तु…. रामचरित मानस को नहीं समझ पाते हैं….

जैसे कि… यह सर्व विदित कि …..जब गाय, भैंस, बकरी आदि पशुओं का दूध दूहा जाता है.. तो, दूध दूहते समय यदि उसे किसी प्रकार का कष्ट हो रहा है ….अथवा वह शारीरिक रूप से दूध देने की स्थिति में नहीं है …तो वह लात भी मार देते है…. जिसका कभी लोग बुरा नहीं मानते हैं….!

सुन्दर कांड की पूरी चौपाई कुछ इस तरह की है…..

प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।
मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥

ढोल, गंवार, शुद्र, पशु , नारी ।
सकल ताड़ना के अधिकारी॥3॥

भावार्थ:-प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा दी.. और, सही रास्ता दिखाया ….. किंतु मर्यादा (जीवों का स्वभाव) भी आपकी ही बनाई हुई है…!

क्योंकि…. ढोल, गँवार, शूद्र, पशु और स्त्री…….. ये सब शिक्षा तथा सही ज्ञान के अधिकारी हैं ॥3॥

अर्थात…. ढोल (एक साज), गंवार(मूर्ख), शूद्र (कर्मचारी), पशु (चाहे जंगली हो या पालतू) और नारी (स्त्री/पत्नी), इन सब को साधना अथवा सिखाना पड़ता है.. और निर्देशित करना पड़ता है…. तथा विशेष ध्यान रखना पड़ता है ॥

इसीलिए….

बिना सोचे-समझे आरोप पर उतारू होना …..मूर्खो का ही कार्य है… और मेरे ख्याल से तो….ऐसे लोग भी इस चौपायी के अनुसार….. विशेष साधने तथा शिक्षा देने योग्य ही है …..

जय महाकाल…!!!

आपकी जानकारी हेतु घटना – संवाद का सम्पूर्ण सन्दर्भ यहाँ दे रहा हूँ ।

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥57॥

भावार्थ:-इधर तीन दिन बीत गए, किंतु जड़ समुद्र विनय नहीं मानता। तब श्री रामजी क्रोध सहित बोले- बिना भय के प्रीति नहीं होती!॥57॥

चौपाई :
* लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥1॥

भावार्थ:-हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश),॥1॥

* ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥2॥

भावार्थ:-ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान्‌ की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात्‌ ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)॥2॥

* अस कहि रघुपति चाप चढ़ावा। यह मत लछिमन के मन भावा॥
संधानेउ प्रभु बिसिख कराला। उठी उदधि उर अंतर ज्वाला॥3॥

भावार्थ:-ऐसा कहकर श्री रघुनाथजी ने धनुष चढ़ाया। यह मत लक्ष्मणजी के मन को बहुत अच्छा लगा। प्रभु ने भयानक (अग्नि) बाण संधान किया, जिससे समुद्र के हृदय के अंदर अग्नि की ज्वाला उठी॥3॥

* मकर उरग झष गन अकुलाने। जरत जंतु जलनिधि जब जाने॥
कनक थार भरि मनि गन नाना। बिप्र रूप आयउ तजि माना॥4॥

भावार्थ:-मगर, साँप तथा मछलियों के समूह व्याकुल हो गए। जब समुद्र ने जीवों को जलते जाना, तब सोने के थाल में अनेक मणियों (रत्नों) को भरकर अभिमान छोड़कर वह ब्राह्मण के रूप में आया॥4॥

दोहा :
* काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच॥58॥
भावार्थ:-(काकभुशुण्डिजी कहते हैं-) हे गरुड़जी! सुनिए, चाहे कोई करोड़ों उपाय करके सींचे, पर केला तो काटने पर ही फलता है। नीच विनय से नहीं मानता, वह डाँटने पर ही झुकता है (रास्ते पर आता है)॥58॥
सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे॥।
गगन समीर अनल जल धरनी। इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी॥1॥
भावार्थ:-समुद्र ने भयभीत होकर प्रभु के चरण पकड़कर कहा- हे नाथ! मेरे सब अवगुण (दोष) क्षमा कीजिए। हे नाथ! आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी- इन सबकी करनी स्वभाव से ही जड़ है॥1॥
तव प्रेरित मायाँ उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए॥
प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई। सो तेहि भाँति रहें सुख लहई॥2॥
भावार्थ:-आपकी प्रेरणा से माया ने इन्हें सृष्टि के लिए उत्पन्न किया है, सब ग्रंथों ने यही गाया है। जिसके लिए स्वामी की जैसी आज्ञा है, वह उसी प्रकार से रहने में सुख पाता है॥2॥
प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥
ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥3॥
भावार्थ:-प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा (दंड) दी, किंतु मर्यादा (जीवों का स्वभाव) भी आपकी ही बनाई हुई है। ढोल, गँवार, शूद्र, पशु और स्त्री- ये सब शिक्षा के अधिकारी हैं॥3 जय श्री राम।

Saturday, 13 July 2019



कमीनेपन की पूरी कहानी इस प्रकार है... बरेली से भाजपा विधायक राजेश मिश्रा काफी सम्मानित, औऱ लोकप्रिय विधायक हैं.. उनकी बेटी साक्षी है.. बेटा है, औऱ जैसे कि बड़े लोगों को आदत होती है 8-10 लोगों को साथ मे लेकर चलने की, तो उसी तरह उनका बेटा भी अन्य लोगों के साथ अजितेश कुमार को भी साथ लेकर चलता, खाने पीने को कुछ टुकड़े डाल देता और अजितेश की मौज रहती..

अजितेश का विधायक के घर मे आना जाना, उठना बैठना, साथ खाना पीना था.. तब इस जातिवादी को कभी नही लगा कि विधायक उसे दलित होने के कारण उसपर अत्याचार कर रहे, उससे छुआछूत रख रहे आदि इत्यादि..

एक हैं राणा साहब, विधायक जी के खास... इन सबका कई-कई बिज़नेस है.. उसी सिलसिले में अजितेश का भी involvement है... अजितेश ने राणा से "डेढ़ करोड़" रुपए लिए और फिर चुकाने की मंशा से मुकर गया.. लालच भर गया, औऱ विधायक की बाकी सम्पत्ति पर भी नजर गई इसकी..

विधायक के घर आना जाना बहुत था.. उनकी लड़की को मोहरा बनाने की इस अजितेश और इसके बाप ने सोंची.. planning की..

विधायक ने साक्षी को पढ़ने जयपुर भेज दिया..  ये लफंगा वहां भी पहुच गया.. तो साक्षी को वापस बुला लिया गया.. इसीलिए वो कह रही कि मुझे पढ़ने नही दिया गया.. जबकि वजह अजितेश औऱ वो खुद थी..

धीरे धीरे अजितेश की planning काम कर गई.. साक्षी इस लफंगे के झांसे में आ गई..

अजितेश की प्लानिंग थी कि लड़की का मैटर आ जाने पर फिर उन डेढ़ करोड़ रुपयों की बात पीछे हो जाएगी, उन्हें चुकाने से छुटकारा मिल जाएगा, बाकी विधायक की सम्पत्ति में से भी हिस्सा मिलने के चांसेस हैं..

अजितेश की पहले भी सगाई हो चुकी है,वो एकनम्बर का अय्यास और शराबी है लड़की को आज नही कल उसके कदम के नीचे से जमीन सरकती हुई नजर आएगी।

ये प्रेम हो ही नही सकता, ये हवस और बदले का नतीजा है।

बाकी उसे पता ही था कि मीडिया जाति को सूँघती हुई आ ही जाएगी, और उसका समर्थन करेगी.. जाति पर अत्याचार जैसे झूठे नैरेटिव की आड़ में उसका कमीनापन छिप जाएगा..

बाकी उसे अपनी जाति का कर्ज भी चुकाना ही होगा.. जाति के मुद्दे को उसने हवा दे दी...

पर भूल गया कि ये सोशल मीडिया का जमाना है... कुंडली, कुंडलिनी से भी खींचकर बाहर निकल आती है..

इस लफंगे की सारी प्लानिंग, असलियत, दूसरी लड़की से सगाई आदि बातें सामने आ गई हैं...

प्रेम-प्यार, जाति-धर्म का कोई चक्कर ही नही, केवल साजिश है...

बस इसे उल्टा लटकाया जाना बाकी है..

इसने अपनी जाति का कर्ज चुकाने के चक्कर मे और नुकसान कर दिया... अब इनपर विश्वास और कम होता जाएगा..

लड़की का पूरी तरह से ब्रेनवॉश कर दिया गया है, वो भौंडा टीवी पर भी लगातार मुस्कुरा रहा था, लड़की अपने परिवार को अपना हत्यार मान रही है....

लड़की के पिता एक सामान्य पिता की तरह हज़ार बार कह रहे है कि मुझसे लड़की-लड़के को कोई खतरा नहीं है,वो बालिग है जहां भी रहे खुश रहे।

उस लड़की को मैं बाज़ारू कहूंगा...जी हां।
किसकी परवरिश में पिता खून पसीना बहाया हो 19 साल तक उसकी खुसी के सपने देखता हो और अंत मे लड़की अपने प्रोग्रेसिव होने के नाम पर उस निर्दोष पिता को सरेआम बेइज्जत करे उसका व्यवहारिक हनन करे, क्या इस तरह के समाज को आप स्वीकार करेंगे?
अगर आपको ये सब ठीक लगता है तो मैं यही कहूंगा कि साक्षी जैसी होनहार और काबिल लड़की भगवान आपके घर पैदा करे....

Saturday, 29 June 2019

मेरे लिए ये मायने नहीं रखता कि कौन हिंदू है या कौन मुस्लिम। मैं किसी से पूछता भी नहीं हूँ कि भाई ! तुम हिंदू हो या मुस्लिम। इसी प्रकार मेरे लिए ये भी मायने नहीं रखता कि कौन फारवर्ड या कौन बैकवर्ड।
                 किसी की जाति-धर्म के बारे में जानने की इच्छा मेरे अंदर बिलकुल नहीं रहती है। किसी कारणवश पता चल जाये तो वह अलग बात है।
          मेरे लिए कोई भी इंसान कैसा है? मतलब उसका स्वभाव कैसा है,विचार कैसा है, उसके गुण क्या-क्या हैं इत्यादि,मायने रखता है। मुझे किसी के रंग-रूप,जाति-धर्म,देश-प्रदेश से कोई लेना-देना नहीं है।
         वास्तव में मुझे व्यक्ति के बुराई से नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ अच्छाई से लेना-देना है। जहाँ अच्छाई है ; जिसके अंदर अच्छाई है,जितनी मात्रा में है,उतनी ही मात्रा में,वहाँ मेरा प्रेम बसता है; उनके लिए मेरा दिल धड़कता है ; उनके लिए मैं कुछ करने की कोशिश करता हूँ।
           मैं बुराई या बुरी नीति का प्रबल विरोधी हूँ। यह जितनी मात्रा में जिस व्यक्ति के अंदर या जिस जगह पायी जाती है मैं उतना ही उससे नफरत करता हूँ। दरअसल,मैं बुराई या बुराई से संबंधित तमाम चीजों का सर्वनाश चाहता हूँ। चाहता हूँ कि सारा आलम अच्छाई से भरा हो।
              मैं जैसा चाहता हूँ वैसा होगा कि नहीं,ये बाद कि बात है। लेकिन इतना तय है कि मैं जैसा चाहता हूँ वैसा करने का प्रयास जरूर करूँगा। पूरा नहीं तो कुछ-न-कुछ अवश्य सही कर दूँगा।
            अक्सर लोग मुझे देखकर धोखा खा जाते हैं। वे सोचते हैं कि मैं कट्टर सवर्णवादी हूँ, लेकिन उन्हें मैं कहना चाहता हूँ कि जैसा आप सोचते हैं वैसा बिलकुल नहीं है। मैं आपको बता दूँ कि "मैं दलित भाई-बहनों या मित्रों से भी उतना ही प्रेम करता हूँ जितना सवर्ण भाई-बहनों या मित्रों से।" बल्कि एक कदम आगे बढ़कर कहूँ तो "मेरे लिए ये मायने ही नहीं रखता कि कौन दलित है और कौन सवर्ण। " अगर कोई अच्छा इंसान है तो फिर बात ही ख़त्म हो गयी। फिर चाहे वह दलित हो,सवर्ण हो,हिंदू हो या मुस्लिम हो,मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। अच्छे इंसान मेरे दिल में बसते हैं।
 वे सदैव आनंदित  रहें मैं यही चाहता हूँ।
            मैं चाहता हूँ कि हर जगह से; हर इंसान के अंदर से बुराइयाँ समाप्त हों और हर जगह; हर इंसान के भीतर अच्छाइयों का वास हो। हर जगह प्रेमपूर्ण वातावरण हो; सद्भाव हो।
मेरी दुश्मनी या नफ़रत सार्वधिक उन लोगों से हैं जो अपने निजी स्वार्थ या संस्था के लिए देश में रहकर देश से ग़द्दारी करते हैं। सेना पर पत्थर फेंकते हैं। या इस राष्ट्र को सम्मान तक नही देते अभी हाल ही मैं एक सांसद ने वन्दे मातरम् को लेकर बयान दिया की वो इस्लाम में हराम हैं। दरसल ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जो इस्लाम में हराम का नाम लेकर अन्य मुस्लिम भाइयों को भी बहला फुसला कर उनसे भी राष्ट्र का विरोध करवाते हैं।
आपका नितिन ..!

Sunday, 9 June 2019

भारत में नहीं होते थे बलात्कार, बलात्कार की प्रथा इस्लामिक दरिंदो ने की शुरू


भारत में बलात्कार की मानसिकता – मुस्लिम हमलावरों की देन ?

किसी भी  समाज में  किसी  भी स्त्री का बलात्कार होना केवल उस स्त्री के साथ अन्याय नहीं वरन उस समाज के सभ्य होने पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है ।  हाल में  हुई दिल्ली में एक लड़की का अमानवीय  बलात्कार और फिर उसकी मौत देश में स्त्रियों की हालत बयाँ करते हैं , ऐसा नहीं ये पहली और आखरी घटना थी , देश में  लभग हर 20 मिनट मे एक महिला का बलात्कार होता है  । ये तो वो आकडे हैं जो पीड़ित द्वारा पुलिस में शिकायत की जाती है, सोचिये .. ये आकडे इससे कही  ज्यादा होंगे क्यों की आभी भी 80% स्त्रियाँ लोक -लाज , गरीब , असहाय  या अशिक्षित होने के कारण थाने तक पहुँच ही नहीं पाती  होंगी। क्या ऐसे में भारत को सभ्य कहा जा सकता है?

पर क्या कारण है की महान भारत जो की   स्त्री को  देवी कह कर पूजता था , जिसने  स्त्रियों को  ” या देवी सर्वभूतेषु ”  कह कर उसे पूजनीय बनाया , पुरुषो द्वारा लिखे गए  वेदों  में भी उसे इतना सम्मान दिया की ”  यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता ” तक कह दिया गया ।

वेदों, रामायण , महाभारत किसी में भी  किसी भी स्त्री का ‘बलात्कार ‘ होने का जिक्र नहीं है , राम ने लंका पर विजय प्राप्त की पर न ही उन्होंने और न  किसी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया । महाभारत में पांड्वो की जीत हुयी लाखो कौरव मारे गए , उनकी स्त्रियाँ विधवा हुयी पर किसी भी पांडव सैनिक ने किसी भी कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक लगाया ।
फिर  अचानक क्या हुआ की इसी भारत में स्त्रियों की इतनी दयनीय स्थिति हो गयी, उनके बलात्कार होने लगे  ? इसके लिए हम को इतिहास में झांकना होगा …

ये तो सभी जानते हैं की भारत पर समय -समय पर विदेशी आक्रमण होते रहे हैं कुछ प्रमुख आक्रमणकारियों के इतिहास को देखते हैं …

सिकंदर :- सिकंदर ने भारत पर लगभग 326-327 ई .पू आक्रमण किया  , पुरु और सिकंदर का  भयंकर युद्ध हुआ हजारो -लाखो सैनिक मारे गए । युद्ध सिकंदर द्वारा जीत लिया गया  , युद्ध जीतने  के बाद भी राजा पुरु की बहादुरी से प्रभावित होक जीता हुआ राज्य भी पुरु को देदिया और बेबिलोन वापस  चला गया । विजेता होने के बाद भी सिकंदर की सेनाओं ने किसी भी भारतीय महिला के साथ बलत्कार नहीं किया और न तो धर्म परिवर्तन करवाया ।

कुषाण :–  (1शताब्दी से 2 शताब्दी )ये  आक्रमणकारी मूल रूप से चीन से आये हुए माने जाते थे,  शक्यो को परास्त करते हुए ये अफगानिस्तान के दर्रो को पार करते हुए ये भारत में पहुचे और भारत पर कब्ज़ा किया , इतिहास में कही भी शायद ऐसे नहीं लिखा की इन्होने पराजित सैनिको अथवा  स्त्रियों  का बलात्कार किया हो ।

हून :- (520 AD ) परसिया को जितने के बाद ये अफगानिस्तान से होते हुए भारत में आये और यहाँ पर राज किया , बलात्कार शायद इन्होने भी नहीं किया किसी भी स्त्री का क्यों की इतिहासकारों ने इसका कही जिक्र नहीं किया ।

और भी आक्रमणकारी थे जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई  जैसे शाक्य आदि पर बलात्कार शब्द तब तक शायद किसी को नहीं पता था।

अब आते हैं मध्यकालीन भारत में …जहाँ से शुरू होता है इस्लामिक आक्रमण , और शुरू हुआ भारत में बलात्कार का  प्रचलन ।

मुहम्मद बिन कासिम :- सबसे पहले मुस्लिम आक्रमण हुआ 711 ई . में मुहामद बिन कासिम द्वारा सिंध पर , राजा दाहिर को हराने के बाद उसकी   दोनों  बेटियों का बलात्कार करके उन्हें  दसियों के रूप में  खलीफा को तौहफे के रूप में भेज दिया ।  तब शायद ये भारत की स्त्रीओं का  पहली बार  बलात्कार जैसे   कुकर्म से  सामना हुआ  जिसमें हारे हुए राजा की बेटियों और साधारण स्त्रियों का जीती हुयी सेना द्वारा बुरी तरह से बलात्कार  हुआ ।
(पाठक मित्र और अधिक जानकारी के लिए इतिहासकार प्रो . S.G.Shevde की पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति ” पेज 35-36 देखे )

मुहम्मद  गजनी :- गजनी ने पहला भारत पर आक्रमण 1001 ई में किया , इसके बारे में ये कहा जाता है की इसने इस्लाम को फ़ैलाने के  ही आक्रमण किया था , सोमनाथ के मंदिर को तोड़ने के बाद उसके साथ  हजारो हिन्दू स्त्रियों को अफगानिस्तान ले गया और  उनके साथ बलात्कार करके दासो के बाजारों  में उन्हें बेच दिया गया ।

मुहम्मद गौरी :- गौरी ने 1175 में सबसे पहले मुल्तान पर आक्रमण किया , मुल्तान में इस्लाम फ़ैलाने के बाद उसने भारत की तरफ रुख किया । पृथ्वी राज को दुसरे युद्ध(1192) में हराने के बाद उसने पृथ्वी राज को इस्लाम कबूल करने के लिए कहा पर जब पृथ्वी राज ने इंकार  तो उसने न की पृथ्वी राज को अमानवीय यातनाये दी बल्कि  उन लाखो हिन्दू  पुरुषो को मौत के घाट उतार दिया और अनगिनत हिन्दू स्त्रियों के साथ उसकी सेना ने बलात्कार की जिन्होंने इस्लाम कबूल करने से मना  कर दिया था ।

इतिहासकार  श्री आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव की पुस्तक ” दिल्ली सल्तनत -711 से 1526 तक के पेज न .  85  पर आप देख सकते हैं की किस प्रकार गौरी ने इस्लाम न कबूल करने वाले हिन्दुओं और  स्त्रियों पर क्या क्या अत्याचार  ।

ये  सूचि बहुत लम्बी है , पर मेरे कहने का बस इतना तात्पर्य है की मध्यकालीन में मुगलों द्वारा पराजित हिन्दू राजाओं की  स्त्रियों का और साधारण हिन्दु स्त्रियों का बलात्कार करना एक आम बात थी , क्यों की वो इसे वो माले-गनीमत या जीत या  जिहाद का इनाम मानते थे।

धीरे -धीरे ये बलात्कार करने की रुग्ण मानसिकता भारत के पुरुषो में भी फैलने लगी , और आज इसका ये भयानक रूप देखने को मिल रहा है … तो इस प्रकार भारत में ‘बलात्कार ” करने की मानसिक रोग उत्त्पन्न हुआ ।

Monday, 20 May 2019

ये बात तो चीख चीखकर बतायी जाती है कि "गोडसे ने गांधी को मारा" लेकिन "क्यों मारा" ये नहीं बताया जाता। किसी को पता हो तो बताने का कष्ट करें?
क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?
क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को … पुणे के ब्राह्मणों के साथ ? क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?
क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l
यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस पंडित नाथूराम गोडसे जी का कर्ज….
आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ….
पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं। अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए
रेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,,” आज़ादी का तोहफा ” रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की… भयानक बदबू……

सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी … बलात्कार किये बिना…..?

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी….

डॉक्टर ने पूछा क्यों ???

उन महिलाओं ने जवाब दिया… हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?

हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं…उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे।

“आज़ादी का तोहफा”

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह था…क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l

विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे….और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए…..पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाउगा….एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l

दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए… क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में

दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई

ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं…

जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि… तुम हिन्दू हो….

4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं…. ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ?? यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर … कितना महान …

जिसने बिना तलवार उठाये … 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया

2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l

10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद

ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो …

परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं …वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल

विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र …

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आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि … परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l

और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए… क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया… या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l

परन्तु ऐसा नही हुआ …. यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी …

यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था … मोहनदास करमचन्द के अनुसार l

नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l

पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे …

उन्होंने फिर से मांग की … की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l

1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l

2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए …. कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए….

2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो … (NH – 1)

3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …

4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)

5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l

30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा l

तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l

हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो …. जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l

यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?

किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?

उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाती और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?

घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ …. जाने कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताड़ित किया गया l

परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l

10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए l

सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे … फिर कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ….

सवाल उठता है की … क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी वध होने वाला है ?

जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की… 35 तारीखें पडीं l

अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित कियाl पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34 सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले … सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे “”

गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी। नाथूराम गोडसे ने न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।

2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।

3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।

4. मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।

5. 1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।

6. गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।

7. गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।

8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।

10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।

11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।

12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।

14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।

16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।

उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर दिया।

न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-

“नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।”

तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?

प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने तो गोली नहीं मारी थी … उन्हें क्यों मृत्युदंड दिया गया ?

नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में कहा था…

यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ

– पंडित नाथूराम गोडसे

आशा है कि लोग पंडित नाथूराम को समझे व् जानें। प्रणाम हुतात्मा को।

भारत माता की जय

“तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें!”

अगर आप नाथूराम गोडसे के समर्थक है तो इस पोस्ट को और लोगो तक भी पहुँचाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक सच्चाई पहुँचे। निश्चित ही एक दिन सत्य की विजय होगी।

।।जय श्री राम।।

Monday, 13 May 2019

अगर गोडसे आज़ाद भारत का पहला हिन्दू आतंकी था,तो हिंदुस्तान का बटवारा करनेवाले क्या देश भक्त थे, ?क्या मुस्लिम लीग पार्टी कोंग्रेस से बड़ी पार्टी थी,? मुस्लिम लीग पार्टी ने महम द अली जिन्ना द्वारा देश का बटवारा कराने में पूर्ण भूमिका निभाई थी,ऐसी मुस्लिम लीग पार्टी आज भी देश का बटवारा कराने के लिए देश में रखी गई है? कमला हसन जवाब देंगे? देश आज़ाद हुआ तब से आज तक देश की राजकीय पार्टियों ने देश की जनता को लुटा है,जनता से विश्वासघात किया है, जनता लुटाती आई है,लुटाती रही है समाज सेवा,देश सेवा करने वाले कार्य कर्ता,नेता कभी गरीब नहीं हुवे,मगर धनिक होते रहे हे,नाम समाज सेवा का,देश सेवा का , और काम करने का जेब,झोली भरने का,मध्य युगीन भारत में लुटेरे थे,जो लूट ने का काम करते थे,वर्तमान समय में तरीका बदला गया है, लुटेरों ने देश सेवा, समाज सेवा का लेबल लगा लिया है,मगर काम लूटने का करते है,हिन्दू अगर आतंकी होते तो आज का अफगानिस्तान जो कभी हिंदुस्तान का भाग गांधार के नाम से जाना जाता था वहा कभी मुस्लिम धर्म को पनाह नहीं मिलती और यह प्रदेश मुस्लिम धर्म वाला नहीं बनता,इतिहास को पढ़ो समझो बाद में कॉमेंट करे,हिन्दू धर्म में कहीं ऐसा नहीं लिखा है कि अन्य धर्म वालो को दरा के जोर जुल्म से हिन्दू बनाओ, देश के बटवारा कराने वाले अच्छी तरह जानते थे कि धर्म के नाम बटवारा हुआ है,हिन्दू धर्म ने कभी देश का बटवारा हो ऐसी बाते नहीं की है,देश का बटवारा का खल नायक मह मद अली जिन्ना ने देश का बटवारा करवाया वजह मुस्लिम हिन्दुओं के साथ नहीं रह सकते,धर्म के नाम बटवारा हुआ पाकिस्तान भारत देश बने,नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या कि वह घटना का सत्य सन१८८५ से सन १९६९ की कोंग्रेस को रखना चाहिए,सन १९६९ से  कोंग्रेस अस्तित्व में हे वो पक्ष कोंग्रेस प्राइवेट कंपनी हे जिस की बागडोर गांधी परिवार यानी इंडिराजी के वारिस दारो के पास है, हिन्दू तो सिन्धु नदी जैसा हे नदी मानव समाज,पशु,पंखी सभी का लालन पालन करती है,पानी में अगर तेरना आता ना हो और डूब जाने से जान चली जाए तो नदी को दोष देना गलत है बस वैसा ही हिन्दू हे, हिन्दू धर्म की रक्षा करनेवाले हमारे पूर्वज राणा प्रताप,शिवाजी, बापा रावल क्या हिन्दू आतंकी थे,ये हमारे पूर्वज ना होते तो कमल हसन आपका नाम कमरूदीन होता और किसी मस्जिद में नमाज पढ़ते होते,दोगले हिन्दुओं ने हिन्दू धर्म को बदनाम किया है ना जाने इस देश में कितने दोगले हिन्दू भरे हुवे हे जो आए दिन हिन्दू धर्म को बदनाम करते रहते हे,आठवीं सदी में हमारे पूर्वज बापा रावल ना होते तो यह देश आठवीं सदी में मुस्लिम बन गया होता,अच्छी तरह से इतिहास पढ़े समझें बाद में कॉमेंट करे,दोगले हिन्दुओं समझ लो और जन लो हिन्दू धर्म कभी आतंकी नहीं था,नहीं है, और कभी आतंकी नहीं बनेगा,हिन्दू धर्म का सूत्र हे जियो और जीने दो,दोगला हिन्दू कमल हसन की विचार धारा देखे, गांधीजी का हत्यारा नाथूराम गोडसे हिन्दू आतंकी था,इसका मतलब यह हुआ कि देश में जितनी भी हत्याएं होती है हत्या करने वाला आतंकी है,कोई हत्या का आरोपी मुस्लिम हे तो मुस्लिम आतंकी कहलाएगा,हिन्दू हत्यारा होगा तो हिन्दू आतंकी कहलाएगा,इशाई होगा तो ईशाई आतंकी, शीख़ होगा तो सिख आतंकी वाह  वाह वाह कमल हसन आपकी बुद्धि को दाद देनी चाहिए,जो भी हत्यारा जिस धर्म का हो आतंकी कहलाएगा,देश का इतिहास आप जैसे दोगले हिन्दुओं ने बिगाड़ कर रख दिया है, जैसे आप की सोच ऐसा आपका दोगला पन है,

Sunday, 5 May 2019

HAL की जगह अनिल अंबानी को राफेल बनाने का ठेका क्यों दिया गया..........!!!!
चलिए विस्तार से जानते हैं
HAL की जगह अनिल अंबानी को राफेल बनाने का ठेका क्यों दिया गया.. जबकि इस कंपनी को कोई अनुभव नहीं है।”
दरअसल, ये सबसे बड़ा झूठ है जो कांग्रेस की तरफ से फैलाई जा रही है। ये झूठ कैसे है? ये आगे बताउंगा, लेकिन ये बात भी जानना जरूरी है कि 2012 में कांग्रेस पार्टी इसके मंत्रीगण मुकेश अंबानी के साथ ये सौदा कर रहे थे, उस वक्त इनकी मोरालिटी कहां गायब हो गई थी? तब ये ठीक था, लेकिन बस भाई को बदला गया तो अनर्थ हो गया? अजीब तर्क है।

अब जरा अंबानी और HAL को लेकर जो कहा जा रहा है वो समझते हैं। राफेल सौदे 7.87 अरब यूरो (करीब 59,000 करोड़ रुपये) का है। इसके साथ ‘ऑफसेट’ कॉन्ट्रैक्ट भी है। इसका मतलब ये है कि संबंधित कंपनी को सौदे की राशि का एक निश्चित प्रतिशत हिंदुस्तान में लगाना पड़ेगा। इस समझौते में 50 प्रतिशत ऑफसेट बाध्यता है, जो देश में अब तक का सबसे बड़ा ‘ऑफसेट’ अनुबंध है। ‘ऑफसेट’ समझौते का मुख्य बिंदु यह है कि इसका 74 प्रतिशत भारत में आयात किया जाएगा। इसका मतलब है कि करीब 22,000 करोड़ रुपये का सीधा कारोबार होगा। इसमें टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की भी बात है, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि DRDO शामिल है। ये सब इसलिए ताकि मेक इन इंडिया को बढावा मिल सके। (ये सब यूपीए के मसौदे में नहीं था)

भारत मे राफेल की सिर्फ असेंबली होगी
एक बात समझने की ये है कि किसी भी विमान को बनाने में कई कंपनियों की हिस्सेदारी होती है। एक छत के नीचे सब कुछ नहीं बनता। इसके अलग-अलग कोंपोनेंट्स को अलग-अलग कंपनियों से लिया जाता है। लाजमी है कि राफेल सौदे में अन्य कंपनियां भी हैं, जिनमें फ्रांस की एमबीडीए तथा थेल्स शामिल हैं। इनके अलावा सैफरॉन भी ऑफसेट बाध्यता का हिस्सा है। दोनों कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इन ऑफसेट बाध्यताओं के लागू करने में संयुक्त उद्यम दस्सो रिलायंस एयरोस्पेस प्रमुख कंपनी होगी।

मतलब ये कि राफेल फाइटर प्लेन को बनाने के लिए रिलायंस को नहीं चुना गया है। दस्सो के साथ जो ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनी है वो नई कंपनी राफेल फाइटर जेट के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार करेगी। मतलब ये कि ये ज्वाइंट वेंचर कंपनी हिंदुस्तान में राफेल फाइटर जेट को सिर्फ एसेंबल करेगी। वैसे भी रिलायंस डिफेंस का पहले से थेल्स कंपनी के साथ एक ज्वाइंट वेंचर है जिसे राफेल के लिए राडार और इलेक्ट्रोनिक्स की सप्लाई के लिए चुना गया था। इसलिए ये कहना कि रिलायंस को कोई अनुभव नहीं है.. ये पूरी तरह बकवास है।
HAL को इस मसौदे से क्यों बाहर रखा गया?......!!!

इस सवाल को उठाने का हक कांग्रेस 1991 में ही खो चुकी है, जब उसने देश में उदारवादी नीतियों को लागू किया था। जिसके लिए ये लोग (नरसिम्हा राव की जगह) मनमोहन सिंह की पूजा करते हैं। HAL एक पब्लिक सेक्टर युनिट है। हिंदुस्तान की अकेली कंपनी जिस पर लड़ाकू विमान बनाने की जिम्मेदारी थी। लेकिन सवाल ये है कि 1940 से अब तक इस सरकारी कंपनी ने भारत को क्या दिया? क्या हिंदुस्तान की वायुसेना HAL के बनाए विमानों का इस्तेमाल कर रही है? दलाली और कमाई के चक्कर में कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने रक्षा के क्षेत्र में कभी आत्मनिर्भर होने की कोशिश ही नहीं की। हम मंगल पर यान भेज पाने में सक्षम हैं लेकिन विश्वस्तरीय विमान तो दूर .. आर्मी के लिए हम एक अच्छी राय़फल नहीं बना पा रहे हैं।

ये जानबूझ कर किया गया। क्योंकि देश की रक्षा के नाम पर इन लोगों ने दलाली और भ्रष्टाचार का एक अभेद्य नेटवर्क तैयार कर रखा है। अब ये टूट रहा है तो कांग्रेस पार्टी को दर्द हो रहा है।

मोदी सरकार जब से आई है, तब से डिफेंस मार्केट को खोलने की शुरुआत हुई है। ये एक अच्छी शुरुआत है। हथियार और विमान बनाना कोई मैकडोनॉल्ड की टिकिया या कोकाकोला की शिकंजी तो है नहीं...। इसमें काफी कैपिटल की जरूरत होती है। सरकार ने हथियार के बाजार को खोला तो रिलायंस, टाटा, L&T, गोदरेज जैसे बड़ी कंपनियों ने इस क्षेत्र में निवेश करना शुरु किया। विदेशी कंपनियों से ज्वाइंट वेंचर शुरु किया। इस बैकग्राउंड में राफेल का मसौदा होता है तो इसकी ऑफसेट कांट्रैक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए किसी कंपनी की तो जरूरत पडेगी ही।

HAL पहले के दिए हुए टारगेट को पूरा नहीं कर पा रही है तो ये लाजमी है कि किसी प्राइवेट कंपनी को ये काम दिया जाए। इसके लिए रिलायंस को चुना गया तो कौन सा पहाड़ टूट गया। जब काग्रेस पार्टी भी 2012 में मुकेश अंबानी के साथ यही काम करने में लगी थी.. लेकिन वो सौदा रास्ते में ही लटक गया इसलिए कांग्रेस इस काम को पूरा नहीं कर पाई। अब यही काम मोदी सरकार कर रही तो राहुल गांधी घोटाला.. घोटाला चिल्ला रहे हैं।  

याद रखने वाली बात ये है कि लड़ाकू विमान राफेल की ख़रीददारी एक विशेष परिदृश्य में की गई, जब भारत का चीन और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनावपूर्ण होने लगे थे। बॉर्डर पर लगातार गोलीबारी और पठानकोट व उरी जैसे हमलों के बाद देश चिंता बढ़ने लगी थी। चीन के साथ डोकलाम में सेना आमने सामने थी। किसी भी वक्त मामला बिगड़ने का डर सताने लगा था। ऐसे नाजुक हालात में भारत को एक विश्वस्तरीय फाइटर प्लेन की जरूरत थी। ऐसा माहौल में जो डील मोदी सरकार ने की उसकी तारीफ होनी चाहिए न कि बिना जानकारी और सबूत के राजनीतिक फायदे के लिए तमाशा करना चाहिए। ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से ज़ुडा है, फ्रांस जैसे मददगार साथी देश के साथ रिश्ते से जुड़ा है..। ऐसे में विपक्ष का भी ये दायित्व है कि वो जिम्मेवार बने। वैसे देश की जनता काफी समझदार है..। कौन चोर है और कौन ईमानदार.. वो भलीभांति जानती है।


Friday, 26 April 2019

                         🚩।।नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि।।🚩

 
          🚩 “हिंदू राजा का राज्याभिषेक महादेव की नगरी काशी”🚩

2017 के यू.पी. चुनावो के अंतिम चरणों मे जब मोदी जी चार दिन काशी मे प्रवास करके पूर्वांचल को मथ रहे थे तब उनके रोड शो मे उमड़ी भीड़ को देख कर विपक्ष मजाक उड़ा रहा था कि मोदी पराजय से भयभीत हो चुके है। इसीलिये काशी मे रूके है और रोड शो मे भीड तो किराये की है। उस समय मैने अपने ब्लॉग मे कहा था कि मोदी जी जैसे शिवभक्त और मां गंगा के पुत्र का बनारस मे चार दिन रूकना कोई साधारण बात नही है।
आज जो मोदी जी का मजाक उड़ा रहे है वो जान ले, मोदी जी प्रवास नही बल्कि मणिकर्णका पर विपक्ष का अंतिम संस्कार कर रहे है और मोदी जी के रोड शो मे स्वत:उमड़ी यही भीड़ विपक्ष के ताबूत पर कील ठोंकने जा रही है और 11 मार्च 17 को यही हुआ भी था.......!!

कल बनारस मे मोदी जी का रोड शो देख रहा था। भगवा की सुनामी के निनाद मे भले ही "मोदी, मोदी, मोदी" का शोर सुनाई दे रहा है, लेकिन नेपथ्य से मुझे पावन काशी के घंटे, घड़ियालों और डमरूओं के स्वरो मे केवल यह सुनाई दे रहा है कि यह केवल रोड़ शो नही है।
यह सनातन राष्ट्रवाद के केसरिया ध्वज को थाम कर भारत को विश्व शक्ति बनाने के साथ साथ मां भारती के पुरातन गौरव को वापस लाने के लिये आतुर चक्रवर्ती सेनापति के साथ उसकी पराक्रमी अक्षौहिणी सेना की शत्रुहंता वाली किलकारी है। ठीक उसी तरह जैसे लंका विजय के प्रस्थान के पूर्व मर्यादा पुरूषोत्तम की सेना के सैनिक उत्साह मे चहुंओर आक्रमण करने पहले शंखनाद कर रहे थे। जिसे सुन कर समुद्र पार दशानन के शिविर मे भय व्याप्त हो गया था। ठीक उसी तरह आज बनारस मे उमड़ा जन समुद्र सनातन और राष्ट्रवाद के घोर विरोधी विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस के भविष्य का पूर्व संकेत दे रहा है।
जो बुद्धिमान होगा वो समझेगा, लेकिन सनातन, राष्ट्र और मोदी से नफरत करने की दौड मे अंधा हो चुका विपक्ष अभी भी समझ नही पा रहा है कि महामानव के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहा यह जनसैलाब प्रतीक है कि देश की सुधी जनता उनकी घिनौनी सियासत की चिंद्दिया बिखेरने के लिये कितना बेचैन है।
लंकेश जैसी विचारधारा को नेस्तनाबूद करने के लिये मां भारती के सनातनी बच्चे कितने बेसब्री से शेष चरणों के युद्ध की प्रतीक्षा कर रहे हैं !!!
फिलहाल मोदी जी के प्रति जनता का प्यार और मोदी जी के सनातनी औरा की तेजस्वी चमक से अंधे हो चुके राजनीतिक विश्लेषक के नाम पर डिबेट मे बैठे कांग्रेस के पिड्डीज ही नही, वरन् सेकुलर, लिबरल, लुटियन, शहरी नक्सली, बौद्धिक बीमारों के साथ साथ देश के मोदी विरोधी नेता और उनकी पार्टी के चारणों के मुंह फक्क हो गये है।
माथे (पेशानी) से पसीना चू रहा है, उनके बीच हाहाकार मचा है।
बेचारो का स्वराज धुंआ छोड़ रहा है, वो अलग बात है कि असुर कुल बेहयाई मे डी.लिट. होने के कारण मुंह से जहर निकाल रहा है बाकी वो परिणाम जान रहे हैं।
खैर एक बात और पूछूंगा, पांच साल पहले कभी आपने टी.वी. (न्यूज चैनलों) पर गंगा आरती, श्लोक, कीर्तन, घंटे, घडियाल, शंखध्वनि या हिंदुत्व के संस्कार आधार्त कोई कार्यक्रम देखा था..??
जानते है यह कैसे संभव हुआ ?? इसके पीछे आपकी संगठित शक्ति है, जिसने मोदी जी को ताकतवर बनाया।
इसलिए प्रत्याशी जाइये भूल याद रखिये केवल मोदी और कमल का फूल !
अंत मे महादेव से 🙏🏻 प्रार्थना है कि , हे परमात्मा सदियों बाद सनातन को नेतृत्व मिला है। कृपया राष्ट्र सेवक पुत्र की रक्षा करियेगा !

वन्दे मातरम्⛳🙏🏻

Thursday, 11 April 2019

मेरे प्रिय , कांग्रेस विचारधारा के बंधुओ “

★ आज सभी राजनीती से उप्पर उठ एक बात करना चाहता हूँ। की आप लोगों की लाचारी देख मुझे ऐसा लग रहा है कि आप लोगो की हालत उन भारतीय सिपाहियों जैसी हो गयी है जो मुगलों और अंग्रेजों की सेनाओं में शामिल हो जाते थे और ना चाहते हुए भी अपने सिद्धांतों से समझौता कर अपने ही लोगो के खिलाफ खड़े हो जाते थे और जबरन ज्यादती करते थे।?

★ आपने हर सुख व दुःख के समय में कांग्रेस की सेवा की। उस गांधी परिवार की सेवा की जिसका महात्मा गांधी से कोई सम्बन्ध नही था लेकिन आपने हमेशा उस परिवार को देशभक्त मानते हुए नेहरू-गांधी परिवार लिखा ।

★ लेकिन भाइयों कहीं ऐसा तो नही इस अंधश्रद्धा और कुछ पाने की लालसा में आप भारत एवं इसकी संस्कृति के विरोधी एवं देशद्रोहियों के समर्थक हो गए जिसे हमारे देश की गरिमा को ठेस पहुचाने में भरपूर प्रयासरत हैं।

★ आप घर में प्रभु श्री राम की पूजा करते हैं, अपने बच्चों को प्रभु श्रीराम जैसा बनने की सीख देते हैं । लेकिन कांग्रेस सरकार ने 2006 में यह कहा कि इस देश में राम जैसा कोई हुआ ही नही सभी मनगढ़ंत कहानिया है ।उस समय आप लोगो को गुस्सा तो बहुत आया होगा लेकिन आपने सोनिया गांधी का साथ देते हुए अपना मुह बन्द रखा।

★ जिस रामसेतु के विषय में हम और आप हज़ारो सालो से सुनते आ रहे थे आप के गांधी परिवार ने उस सेतु को तोड़ने की साजिशें की । यह मात्र एक सेतु तोड़ने की योजना नही थी बल्कि देश में जातिगत दंगे हो और देशवासियो का मनोबल तोड़ने की साजिश थी। आप राजनीती और लालसा में इतने डूबे थे कि आपने रामसेतु के विरोध में तर्क देना शुरू कर दिया । प्रभु की कृपा से सेतु तो बच गया

★ किन्तु प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में आप कभी अपने आराध्य के लिए मुह भी नही खोल सके। वह कौन सी लालसा हो गयी कि अपने पुरखों के स्थान पर आप विदेशी के नाम की इमारत बनवा दें। आपके दिल में कई दफा अपने नेताओं के प्रति गुस्सा तो होता था लेकिन पार्टी से निकाले जाने के डर से आप चुप रह जाते थे।

★ मेरे आदरणीय कांग्रेसी भाइयों अब तो हद हो चुकी है। JNU में भारत के खिलाफ नारेबाजी की गयी ।अफज़ल गुरु के समर्थन में नारे लगाए गए। वही अफज़ल गुरु जिसने लोकतंत्र के मंदिर में हमला करवाया था।उस हमले में शहीद हुए जवानों की विधवाओं के घावों को फिर ताज़ा कर दिया ।

★ भारत की बर्बादी तक जंग जारी रखने वालो के साथ आप की पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष  राहुल गांधी खड़ा है।जिस पार्टी में अपने नेताओं के खिलाफ बोलने की आज़ादी नही है वह पार्टी जो धारा 370 हटाने की बात होने को साम्प्रदायिकता कहती है!

★ जो पार्टी गौहत्या पर रोक की मांग को असहिष्णुता कहती है। उसी पार्टी का अध्यक्ष देश विरोधी बयानों ,हमारे संविधान को गाली देने वालो को बोलने की आज़ादी देने की बात करता है।
और कही न कही आप सभी कार्यकर्ता उन देशद्रोहोयों के साथ खड़े हो।

★ कितने अफज़ल मारोगे 'हर घर से अफजल निकलेगा' और हमारे और आप के परिवार के लिए ही खतरा बनेगा।

★ राहुल गांधी का क्या है ये तो हवाई जहाज में बैठकर इटली भाग जायेगा। अभी भी वक़्त है भाइयों ऐसी पार्टी को छोड़ देश के लिए आगे आइये । तिरंगे का सम्मान करें।
देश की अखण्डता का सम्मान करें इसी से हमें और आप को सम्मान मिलेगा ।

★ और यदि अभी भी आप राजनीति और चापलूसी के लिए आवाज़ दबा लेंगे तो आप का स्वाभिमान खत्म कर लेंगे ।क्योंकि अब बात देश की है और देश के विरोधियों को सबक सिखाने का वक़्त है।

 ★ अब यहाँ आपको तय करना है की राजनैतिक फायदे के लिए कांग्रेस की राष्ट्रविरोधी नीतियों के साथ रहना है या अपने राष्ट्र ,परिवार और आने वाली पीडी को सुरक्षित, सम्मानित और स्वाभिमान भरा जीवन देना है।।

★ अभी नये घोषणा पत्र की घोषणा की हैं की राष्ट्र्द्रोह का क़ानून हटा देंगे । मतलब हमारी आँखो के सामने भारत माता को कोई गाली देगा ओर हम उसका कुछ नही कर पाएँगे।

★क्या कश्मीर से सेना हटाने की बात से सहमत हो ?? 

भारत माता की जय
"एक हिन्दुस्तानी" ✍🏻

Friday, 29 March 2019


                                                                                  @nitinmudgal 

 रघुराम राजन, 

कांग्रेस द्वारा हैंडपिक कर बनाए गए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI के पूर्व गवर्नर,

आजकल अपनी किताब को लॉन्च और प्रमोट करने मुंबई में पाए जाते हैं,

इन्हीं परम् प्रतापी रघुराम राजन के कार्यकाल में भारतीय सरकारी बैंकों की 83% पूंजी कांग्रेस ने अपने करीबियों को कमीशन खाकर लोन के रूप में बांट दी थी,
जो कुल मिलाकर 34 लाख करोड़ रुपए थी और वह सब 2014 में डूबकर एनपीए हो चुका था,

और RBI चीफ रहे इन महाशय रघुराम राजन ने कांग्रेस को बैंकों के 34 लाख करोड़ों रुपए लूटने और डुबाने की खुली छूट दी हुई थी।
नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के बाद..
जब महंगाई 4% से नीचे आ चुकी थी,,,

तब भी इन महानुभव रघुराम राजन ने रेपो रेट नहीं घटाया, जबकि सभी इंडिकेटर इसके पक्ष में थे,

 इसी गलती से भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ बाधित हुई।

यह वही महान विभूति रघुराम राजन है जो कांग्रेस के अंतिम दिनों में चिदम्बरम संग मिलकर गोल्ड एक्सचेंज की 80:20 स्कीम लेकर आए थे,

 जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ, परंतु नीरव मोदी-मेहुल चौकसी जैसे ज्वेलरी कारोबारियों को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाया गया,

ये महारथी रघुराम राजन भारत के सभी झोलाछाप लेफ्ट लिबरल अर्थशास्त्रियों के डार्लिंग हैं,

इनके प्रथम कार्यकाल की समाप्ति पर जब नरेंद्र मोदी द्वारा इन्हें RBI गवर्नर का दूसरा कार्यकाल नहीं दिया गया, तब सभी बुद्धिजीवियों, कांग्रेसियों, वामपंथीयों, झोलाछाप अर्थशास्त्रियों व विभिन्न बिजनेस चैनल के एंकर और एडिटरों ने विलाप कर ऐसा माहौल बना दिया था
कि अब इनके बिना तो इंडियन स्टॉक मार्केट ही कोलैप्स कर जाएगा,

जबकि हुआ उसके ठीक उलट,

 जिस दिन इनका कार्यकाल समाप्त हुआ उसी दिन निफ्टी ने डेढ़ सौ पॉइंट्स की छलांग लगाई थी,

 सभी झोलाछाप अर्थशास्त्रियों की थ्योरियां औंधे मुंह गिरी थी और मार्केट में एक रैली शुरू हो गई थी।

रघुराम राजन ने सीएनबीसी tv18 से बात करते हुए भारत की 7% से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के आंकड़ों पर भी बिना तथ्यों साक्ष्यों और सबूतों के प्रश्न चिन्ह लगाए हैं,
बढ़ते हुए राष्ट्रवाद को अर्थव्यवस्था के लिए एक खतरा बताया और RSS के प्रति अपने अपरहीहेंशन्स व्यक्त किए,

उसके बाद जब इन्ही रघुराम राजन से प्रश्न पूछा गया कि
 "क्या आप कांग्रेस पार्टी के टच में हैं ?"

तो इन्होंने स्वीकार किया कि वह चिदंबरम, राहुल गांधी, मनमोहन सिंह से अक्सर बात करते रहते हैं,

और जब राहुल गांधी की ₹72000 प्रति वर्ष बांटने की योजना का उल्लेख हुआ, तो उन्होंने कहा कि इस योजना में मेरे भी आईडिया सम्मिलित हैं और माना की उन्होंने ही राहुल गांधी को इस योजना पर सुझाव दिए हैं,



अब जरा इनके पाखंड की पराकाष्ठा देखिए ..

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को ₹6000 वार्षिक देने की शुरुआत की तो यह उसकी निंदा कर रहे थे और उसे अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताया था,
और सरकारी खजाने पर इसका बुरा प्रभाव पड़ने की बात कही थी,

और अब यही रघुराम राजन आज राहुल गांधी को ₹72000 वार्षिक बांटने का सुझाव दे रहे हैं ,,, और खुलकर उनकी इस योजना का समर्थन कर रहे हैं, मतलब काम करने वाले किसानों को ₹6000 देना गलत है,

परंतु ₹72000/वर्ष बेरोजगारी बढ़ाने और मुफ्तखोरी बढ़ाने के लिए दे देना अच्छी योजना है,

यह है रघुराम राजन का अर्थशास्त्र।

उसके बाद इन्हीं रघुराम राजन ने बड़े लालायित होते हुए कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो भारत आकर रिजर्व बैंक के गवर्नर की कुर्सी संभालने के लिए वे सहर्ष  तैयार हैं,
यानी भारतीय इतिहास के सबसे कलंकित ट्रैक रिकॉर्ड वाले RBI गवर्नर रघुराम राजन जो आने कार्यकाल में PSU बैंकों की 83% पूंजी यानी 34 लाख करोड़ लुटवा चुके हैं
वही अब कांग्रेस के सत्ता में आने पर RBI गवर्नर की कुर्सी पर बैठकर देश की अर्थव्यवस्था का पुनः भट्टा बैठ आने के लिए तत्पर हैं।

देश की जनता को एक बार यह देखने और समझने की आवश्यकता है कि किस ट्रेक रिकॉर्ड और मानसिकता के लोग आज कांग्रेस के पक्ष में बैटिंग कर रहे हैं, और ईश्वर न करे किन्तु यदि भूल से भी कांग्रेस सत्ता में आ गई,

तो ऐसे लोग पुनः महत्वपूर्ण पदों पर बैठकर अपना वही कलंकित ट्रैक रिकॉर्ड आप को दोहराते हुए और देश को हानि पहुंचाते हुए आपको मिलेंगे।

Saturday, 23 March 2019

चमचे ओर उनके मालिक के लिए समर्पित

लालकृष्ण आडवाणी जी 91 वर्ष की आयु में स्वेच्छा से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं....

जबकि गांधी परिवार की राजनीतिक शक्ति के लिए चुनौती बना हर कांग्रेसी नेता सन्दिग्ध परिस्थितियों में मारा गया....

देख लीजिए स्वयं 

लाल बहादुर शास्त्री 62 वर्ष की आयु में 

   माधवराव सिंधिया 56 वर्ष

   राजेश पायलट 55 वर्ष

  वाईएसआर रेड्डी 60 वर्ष

  
भाजपा में नेता साधारण परिवार से आकर शीर्ष तक पहुंचते हैं और फिर क्षमतावान योग्य व्यक्तियों के लिए स्वेच्छा से उनके लिए स्थान बनाते हैं....


जबकि कांग्रेस में तो सोनिया गांधी को अध्यक्ष पद देने के लिए सिटिंग कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी को कांग्रेसियों द्वारा उठाकर सड़क के फुटपाथ पर फेंक दिया जाता है।


 यह है कांग्रेस द्वारा अपने शीर्ष नेताओं को दिये आदर का छोटा सा विवरण, अतः सुरजेवाला जैसे कांग्रेसी प्रवक्ता को एक बार अपनी कांग्रेस पार्टी का इतिहास देख लेना चाहिए।


ओर चमचे पहले अपनी राजनीतिक परिवार पार्टी खांग्रेश की धो ले वैसे भी ४४ सीट हैं भाजपा में घुसोगे तो ४ भी नही बचेंगी 

Saturday, 9 February 2019

           "वैलेंटाइन डे एक अभिशाप है 

        वैलेंटाइन डे का दुष्परिणाम भारत में

वैलेंटाइन के 7 दिन के पागलपन के चक्कर में हर साल लगभग 60-70 लाख लड़कियों के Nude picks और MMS व्हाट्स एप्प पर वायरल होते हैं...उन picks/MMS को देशी पोर्न साइट्स बेचकर करोड़ो रूपये कमाती हैं...

वीडियो वायरल होने पर ज्यादातर लडकिया आत्महत्या कर लेती हैं,,कभी कभी तो पूरा परिवार ही आत्महत्या कर लेता है...


लेकिन कभी किसी nude pick/MMS में को ध्यान से देखना, सब लड़की के सामने और लड़की की मर्जी से क्लिक/रिकॉर्ड किया गया रहता है...


जिसमे से 60% ऐसा मिलेगा जिसमे लड़की ने खुद से ही अपने फोन से फोटो/वीडियो बनाया होता है...


लड़कियों में इच्छा शक्ति 10 गुना, और तार्किक क्षमता 1/10 गुना होती है...

मतलब लडकियों के हिसाब से केवल वही सच होता है, जो वो देखती है,,लेकिन 90% चीजे दिखाने के लिए प्लान की जाती हैं,,,उनको ये नही समझ में आता... इसका एक ओर उदाहरण है लव जिहाद

लड़कीया एक बार जो चाह जाए वो खुद कर या दुसरे से करवा सकती हैं...लेकिन एक घंटे उस काम परिणाम क्या होगा... उनको वो नही समझ में आता...

इसीलिए लड़कियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है,,,धर्म, संस्कार, चरित्र ये सब केवल इसीलिए होता है,,ताकि उनकी इच्छाए,,,सकारात्मक और कल्याणकारी हो...

लेकिन आज आप क्या करते हो, परवरिश के नाम पर किताबी ज्ञान ,बॉलीवुड की फिल्मे और विदेशी पैसो से चलने वाले चैनलों के टीवी सीरियल...के भरोसे छोड़ देते हो...

कभी संस्कार ( ज्ञान, कर्म, धर्मनिष्ठा ) सिखाया या बताया, उसको....???

-कल को कुछ हो जाए तो फिर,,,अपनी ही बेटी को बदचलन, आवारा, रंडी,बेहूदा सब बना देते हो...
फिर समय, जमाना, सरकार, पुलिस, कानून यहा तक की भगवान को भी दोष देते हो...

जबकि पूरी गलती आपकी खुद की होती है...

इस बार RSS/VHP/HYV/बजरंगदल नही बल्कि आप खुद क्रिसमस से वैलेंटाइन तक अपनी बहन/बेटी पर नजर रखोगे...

बहन/बेटी आपकी है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आपकी है...

या फिर दुसरो की नंगी तस्वीरे और MMS देखते देखते पक गये हो...और इस बार अपनी बहन/बेटी की नंगी फोटो/वीडियो देखने का मन हो....तो कोई बात नही..

किसी की भी भावना आहत हुई हो तो क्षमा करना मगर धर्मनिष्ठ हूँ और रहूँगा 🚩🙏

जनजागृति हेतु इस ब्लॉग को पढ़ने के उपरांत अवश्य साझा करें..​
         नितिन मुदगल "(राष्ट्रवादी)"