Friday, 15 September 2023

Wake Up Call

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है।


दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है, और सभी हिंदू पुरुषों को ब्रह्मचारी बनने का संदेश देता है।

कृपा यहीं अटकी हुई है।
हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान, पेड़ लगाओ, सभ्य बनो, अनाथालय चलाओ, अस्पताल चलाओ, योग शिविर, ध्यान शिविर, मुफ्त शिविर लगाओ में जाता है।
इसके विपरित, मुस्लिम कभी दान दक्षिणा में विश्वास नहीं करता। वो सिर्फ जकात देता है, जिसका इस्तेमाल इस्लाम को बढ़ाने में होता है। बाकी सभी लोगों से वो पैसा छीनता है।

मुसलमान सारी मुफ्त सुविधाओं का लाभ लेता है, अस्पतालों में भीड़ देखो, बैंकों में योजनाओं का लाभ लेने वालों की भीड़ देखो, तुम्हें सच पता चल जायेगा।

मुसलमान हर पल भारत पर कब्जा करने की तैयारी में लगा हुआ है, और हिंदू दान दक्षिणा से ऊपर ही नही उठ पा रहा है।

जब तक हिंदू की नींद खुलेगी, तब तक मुसलमान भारत पर कब्जा जमा चुके होंगे। फिर ये धर्मगुरु, शिविर चलाने वाले, रक्तदान करने वाले, भंडारा करने वाले, पेड़ लगाने वाले; ये सब बैठ के रोएंगे कि "हमे बचा लो, हमें बचा लो"। पर बचाएगा कौन?
जब तुम्हें युद्ध की तैयारी करनी चाहिए थी, तब तो तुम दान पुण्य में लगे थे। अब रोने से क्या होगा, क्योंकि तुमने सिर्फ धर्म को करने पर ध्यान दिया लेकिन तुमने यह नहीं सोचा कि कोई अधर्म द्वारा तुम्हारे धर्म को मिट्टी में मिला रहा है, क्योंकि तूने सिर्फ अच्छा किया लेकिन तुम्हारे घर में कोई डाका डाल रहा है तुम्हारे देश में कोई डाका डाल रहा है तुमने उसे आंख मूंद लिया रोना तो पड़ेगा ? तुम्हारा सबकुछ मुसलमानों का है। उन्होंने अपना दिमाग सही जगह लगाया। फालतू के चोंचले कभी पाले ही नही।

तुमने कभी युद्ध की तैयारी नही की। ना हथियार खरीदे, ना हथियार बांटे, ना दूसरों को चलाना सिखाया, ना अपने बच्चों को चलाना सिखाया। इसकी कीमत तो तुम्हें चुकानी ही होगी।

इन भंडारों, दान दक्षिणा से आगे निकलो, और युद्ध की तैयारी करो।
भंडारे लगाना ही है, तो हथियारों के लगाओ। बाकी सब बेकार की बातें हैं।
ट्रेनिंग देना ही है तो पुण्य और वृद्ध आश्रम खोलने के बजाय, हथियार कैसे चलाना है, चाकू कैसे चलाना है, तलवार कैसे चलाना है, पेपेर स्प्रे कैसे चलाना है, गुलेल कैसे चलाना है, पत्थर कैसे फेंकना है, बंदूक कैसे चलाना है, पेट्रोल का प्रयोग कैसे करना है। ये सिखाओ...

सामने वाली टीम इसी काम में लगी हुई है। तुम कब शुरू करोगे, ये सोच लो।

इससे पहले कि समय हाथ से निकल जाए, अपनी ऊर्जा सही काम में लगा लो।
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Saturday, 17 June 2023

सामाजिक रितियाँ

 मृत्युभोज पाप है इसलिए बन्द करो, शादी में खर्च करना पाप है इसलिए कोर्ट मैरिज करो। 


लेकिन हनीमून बहुत बड़ा पुण्य है इसको मनाने विदेश जाओ पैसा लुटाओ क्योंकि हनीमून से हजारों गरीबों का पेट भरता है।


मतलब परिवार, रिश्तेदार, गाँव-समाज, पड़ोसी गाँव के परिचित व्यक्ति, पिताजी के हितैषी और व्यवहारियों को एकजुट करना, उनसे मिलना तथा पीढ़ियों से चले आ रहे व्यवहार को अगली पीढ़ी में सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए मृत्युभोज या शादी के न्यौते दिए जाते हैं। ताकि हम समझ सकें कि हमारी रिश्तेदारियाँ कँहा कँहा है, हमारे पुरखों के सम्बंध व्यवहार कँहा कँहा और किन किन लोगों से हैं। 


इसलिए मिलने वाले लोग कुछ भेंट लेकर जाते हैं और उस भेंट को एक डायरी में लिखा जाता है ताकि याद रहे कि हमारे परिवार के सम्पर्क कँहा कँहा किन किन लोगों से हैं। 

वैसे तो लोग अपनी निजी जिंदगी में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें पता ही नहीं होता है कि उनके अपने कौन कौन है। इसलिए ऐसे ही कुछ कार्यक्रम होते हैं जँहा अपनों से भेंट हो पाती है। 


आज इन समाजिक और मानवीय व्यवस्था को तोड़कर मनुष्य को एकांकी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अब 2 बच्चे ही अच्छे के कारण परिवार और रिश्तेदार वैसे भी सीमित हो गए हैं ऐसे में सामाजिक व्यवहार ही एकदूसरे मनुष्य के सहायक हो सकते हैं अगर उनसे भी दूर कर दिया गया तो मुसीबत के समय कौन खड़ा होगा अपनों के साथ?? 


आज हम लोग पार्टी करते हैं तो कुछ अपने दोस्तों को बुलाकर इंजॉय करते हैं क्योंकि अच्छा लगता है। लेकिन ये कभी नहीं सोचते की ये भोज भी एक तरह की पार्टी होते हैं जँहा हमारे रिश्तेदार एकजुट होते हैं और न जाने कितनी पीढ़ियों के व्यवहार और रिश्तेदारियों का नवीकरण होता है। 


आज अगर इसी तरह से एकांकी जीवन पर जोर दिया जाता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा जब मानसिक अशांत लोगों की संख्या बहुत अधिक होगी, आत्महत्या के मामले बहुत अधिक होंगे। 


आज की पीढ़ी अपनी मस्ती में इतनी व्यस्त होती है कि उसको कुछ प्रमुख रिश्तेदार को छोड़कर 2-3 पीढ़ियों की रिश्तेदारी तक याद नहीं होती है। साथ ही साथ पिता के कुछ जान-परिचितों को छोड़कर दादा-परदादा के व्यवहारियों तक का पता नहीं होता है। आसपास के 10-15 गाँव में हमारी जाति के तथा हमारे परिचित के कौन कौन व्यक्ति है ये तक पता नहीं होता है। 


लेकिन जब मृत्युभोज होता है तो ऐसे सभी परिचितों को मिलने समझने का मौका मिलता है और पीढ़ियों से चले आ सम्बन्ध अब हमको आगे लेकर चलना है ये सीख मिलती है। 

हमारे यँहा मृत्युभोज में जाने के लिए बड़े-बूढ़े अधिक जोर देते हैं क्योंकि परिचित का व्यक्ति चला गया है अब उसकी अगली पीढ़ी से परिचय बहुत जरूरी है ताकि सम्बन्ध बने रहें ऐसी धारणा है। लोग खाने के भूँखे नहीं होते हैं बल्कि समाजिक भावना का ध्येय होता है वैसे भी नियम होता है कि आयु और पद में छोटे की मृत्यु पर खाना नहीं खाते हैं। 


हमें बचपन से पढ़ाया जाता है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है लेकिन समाजिक भावना का जिस प्रकार लोप हो रहा है उस हिसाब से मनुष्य के अस्तित्व पर खतरा बढ़ता जा रहा है। हमारे पूर्वज बहुत बुद्धिमान थे जिन्होंने ऐसी व्यवस्थाएं बनाई थी जिनमें समाजिक भवनायें पोषित होती रहें लेकिन आधुनिकता की इस दौड़ में हम अपने पूर्वजों की दूरदर्शिता को समझे बिना ही मूर्खता की ओर भागे जा रहे हैं। 

 

Monday, 1 May 2023

इंदौर में सीनियर डॉक्टर द्वारा 50 रुपए के शुल्क में इलाज

 इंदौर में 50 रुपए में सीनियर डॉक्टरों से करवाएं इलाज, जांचों का दाम भी बेहद कम, सभी से शेयर करें यह जरूरी जानकारी 👩🏻‍⚕️


इंदौर में श्री गुरुजी सेवा न्यास द्वारा संचालित ‘माधव सृष्टि चमेली देवी अग्रवाल मेडिकल सेंटर’ में बड़े डॉक्टरों द्वारा न्यूनतम शुल्क में इलाज की सुविधा दी जा रही है। जिसमें निम्न सुविधाएं न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध हैं-

ओपीडी :मात्र 50/-

सोनोग्राफी :मात्र 500/-

डायलिसिस : मात्र 400/-

फिजियोथेरेपी : मात्र 100/-

योग क्लास मात्र : 300/- प्रति माह

आंखो की जांच मात्र :100/-

पैथोलॉजी टेस्ट एवं एक्सरे सस्ती दरों पर

दवाइयां 30% से 70% तक सस्ती


कार्डियोलॉजिस्ट

डॉ. भारत रावत : हर मंगलवार, सुबह 10-11

डॉ. उल्लास महाजन : हर सोमवार-मंगलवार, सुबह 11-12


न्यूरोलॉजिस्ट

डॉ. दीपक जैन  : हर शनिवार, दोपहर 3-5


नेफ्रोलॉजिस्ट

डॉ. जय कृपलानी : हर मंगलवार, शनिवार, सुबह 9-10


सर्जन

डॉ. संजय दाते : हर गुरुवार, शाम 4-5


चेस्ट एवं टीबी

डॉ. विजय छजलानी  : हर शुक्रवार, सुबह 10-11

डॉ. इशानी वैद्य : हर मंगलवार, गुरुवार दोपहर 3-5


जनरल फिजिशियन

डॉ. सपना चौधरी : सोमवार-शनिवार, सुबह 10-12

डॉ. कल्याण राठी : सोमवार-शनिवार, शाम 4-6


पेट रोग विशेषज्ञ

डॉ. अमोल पाटिल : हर शनिवार, सुबह 10-12


मधुमेह रोग विशेषज्ञ

डॉ. रीता गुप्ता पाटिल : हर मंगलवार, दोपहर 11-1


शिशु रोग विशेषज्ञ

डॉ. रत्नेश खरे : हर बुधवार, सुबह 10-12

डॉ. पल्लवी कलंत्री : हर सोमवार, गुरुवार, सुबह 10-12

डॉ. सौरभ पिपरसानिया : हर शुक्रवार, सुबह 10-12


दंत रोग विशेषज्ञ

डॉ. सौम्या जैन : हर मंगलवार, शनिवार, सुबह 10-12

डॉ. ईश तारणकर : हर बुधवार, शुक्रवार, दोपहर 3-5

डॉ. विजय मोहन अग्रवाल : सोमवार-शनिवार, दोपहर 12-2


हड्डी रोग विशेषज्ञ

डॉ. अंकुश अग्रवाल : हर मंगलवार, शुक्रवार, सुबह 1.30-3

डॉ. लवेश अग्रवाल : हर गुरुवार 10-12


स्त्री रोग विशेषज्ञ

डॉ. नेहा खटोड़ : हर मंगलवार, शुक्रवार सुबह 10-12

डॉ. चित्रा श्रीवास्तव : हर बुधवार, सुबह 10-12

डॉ. रेखा अग्रवाल : हर गुरुवार, सुबह 10-12


नाक कान गला विशेषज्ञ

डॉ. माधवी पटेल : हर बुधवार, शनिवार, सुबह 10-12

डॉ. राजकुमारी (खत्री) सचदेवा : हर गुरुवार, सुबह 10-12


चर्म रोग विशेषज्ञ

डॉ. बुरहानुद्दीन सैफी : हर मंगलवार, शुक्रवार दोपहर 3-4

डॉ. शीतल सेठी : हर सोमवार, सुबह 10-11


रेडियोलॉजिस्ट (सोनोग्राफी)

डॉ. सचिन गडपाल

सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार

सुबह 9-11


पता :माधव सृष्टि चमेली देवी अग्रवाल मेडिकल सेंटर, वसंत विहार बॉम्बे हॉस्पिटल के पीछे, इंदौर