Sunday, 29 March 2020

द्वितीय दिवस तृतीय कथांश से हमने क्या सीखा:-

1)गुरु विश्वामित्र श्री राम जी को बताते हैं कि वीर वही जो वीरता का प्रदर्शन अपने आडम्बर और अहंकार के लिए न करे, दिव्य अनुसंधान की प्राप्ति भी सरलतापूर्वक ही होती है, गुरु दक्षिणा में मुनि श्रेष्ठ ने भी परहित ही मांगा:-किसी भी निर्दोष मनुष्य का अपनी वीरता से संरक्षण करना ही मेरी सबसे बड़ी दक्षिणा होगी।
2) जब क्षत्रिय रक्षक संरक्षक हो तो अपने तपकर्म से  अनुसंधानकर्ता नये प्रयोग कर उपाय खोज लेता है वहाँ श्री राम ने संरक्षण किया और ऋषियों ने अनुसंधान किया यहाँ सेना और पुलिस संरक्षक है और डाॅक्टर और वैज्ञानिक अनुसंधानकर्ता ।।
3) पीढियाँ बीत जाती है कुल को तारने के लिए लेकिन जब तक दृढ़ निश्चय नही किया जाये तब तक तप कर्म अधिक अवधि तक नही होते अर्थात अधिक अवधि तक भगीरथ जी द्वारा किया तपकर्म ही माँ गंगा के वेग को आदिदेव की जटाओं के माध्यम से धरती तक नियंत्रित कर पाया ।
4) दूसरे के प्रति किया गया छ्ल मृत्युदंड ही देता है वह छ्ल जिसके प्रति किया गया है और जिसने किया है दोनो को नष्ट कर देता है अत: सजग रहे कभी भी आपकी गलती दो परिवारों या दो व्यक्तियों के विनाश का कारण न बने।
5) कितना भी बड़ा राजा हो मर्यादा उसका सबसे कुशल शस्त्र होती है इसलिये श्री राम जी ने गुरु आज्ञा से पुष्प लाने के पूर्व उस माली से आज्ञा ली जिसके अधिकार क्षेत्र में वाटिका थी इसके अलावा गुरु पास हो तो उनकी सेवा और बड़े भ्राता साथ हो तो उनकी सेवा परम कर्तव्य है यह आज बहुत ही प्रेमपूर्वक सिखाया गया।

इसके अलावा माँ गौरी की पूजन कुंवारी कन्या ही करे जो रीति आज भी विवाह के पूर्व मातापूजन के नाम से निभाई जाती हैं अर्थपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया ।।🙏।।


रामायण के चतुर्थ कथांश से आपका क्या अभिप्राय है??

1) स्वयंवर के पूर्व ही श्री राम ने अपने अनुज को पूर्वाभास करा दिया कि परीक्षा की घड़ी में उत्तेजित नही होते,,तत्पश्चात् ये बात उन्होनें श्री परशुराम जी से संवाद तक स्मरण रखी और बाल्य चपलता कर श्री परशुराम जी के आवेश को शनै:-शनै: अहंकार की सीमा तक लेकर आये।
2) स्वयंवर के समय सभी ने श्री राम की शक्ति का आंकलन किया राजाओं ने अहंकारवश तथा महारानी सुनयना जी और जनक जी ने अधीर होकर। जबकि राजहठ पूरा न होते देख धीरज रखना चाहिए न कि अधीर होना चाहिये:- जिसका पालन आज योगी आदित्यनाथ जी सबसे बड़ा राज्य होने के बाद और मोदी जी , अमित शाह जी पूरे देश के लिए कर रहे हैं ।
3) अन्तर्मन के उद्गार हमेशा निराश होने पर ही फूटते है जैसे सभी राजाओं की निर्बलता और अहं देखकर राजा जनक जी के उद्गार फूट पड़े।
4) समय देखकर निर्णय लेना प्रभु की सबसे बड़ी आज्ञा होती हैं जैसे गुरु विश्वामित्र जी ने श्री राम को आज्ञा देने का निर्णय लिया, और मर्यादा का पालन कर सीता जी के प्रेम की अधीरता चित्त में होते हुए भी श्री राम बिना गुरु की आज्ञा के नही उठे।
5) सर्वप्रथम अपने से बड़े का सामना हो तो स्वयं को उनका दास बना लो ये श्री रामजी ने बताया, क्योकि बिना रणभूमि के किसी सभा में क्रोध को क्रोध नही अपितु प्रेम और वात्सल्य ही नियन्त्रित कर सकता है।
6) क्षत्रिय का धर्म स्त्री,गौ,और ब्राह्मण की रक्षा करना होता है आज ये परिस्थिति हमसे विमुख है , क्षत्रिय श्रेष्ठ होकर भी मर्यादा का पालन कर इन्हे प्राथमिकता देता है । ब्राह्मण अपनी आत्मरक्षा के स्त्रोत सदैव पूर्व दिशा में रखता है श्री परशुराम जी  की आत्मरक्षा का स्त्रोत ही क्रोध बन चुका था, लेकिन उस क्रोध के संचय ने अहंकार को जन्म दे दिया। इसलिये जरूरत समाप्त होने पर श्री परशुराम जी ने उस पर श्री राम जी से बाण सन्धान करवाया।

श्री राम ने ससुर जी को भी पिता की संज्ञा दी और उनके पैर छुए आज ये रीति विपरीत हो गई समय के साथ जो कि निराशाजनक है। संस्कारवश मैं कभी पराई स्त्री, और सास-ससुर जी  से पैर नही छुआता तो मैने स्वयं को यहाँ सही पाया🙏



Saturday, 28 March 2020

श्री रामानंद सागर जी द्वारा प्रस्तुत रामायण जी का आज दिनांक 28 मार्च से पुनः आरंभ हुआ।

रामायण के हर क्षण में कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। 

1. जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है उस समय कुछ मांगने से उसकी इच्छा पूर्ण होती है - जैसे राजा दशरथ को संतान प्राप्ति
2. घर मे हवन यज्ञ आदि करवाना चाहिए
3. किसी के समक्ष कुछ मांगने के लिए भिक्षुक बन जाना चाहिए - जैसे राजा दशरथ ऋषि से यज्ञ करवाने के लिए भिक्षुक बने थे
4.विद्या आरंभ का श्रेष्ठ मुहूर्त वसंत पंचमी होता है
5. दिनचर्या शुरू करने से पूर्व स्नान आदि करके ईश्वर को फिर पिता को प्रणाम करना चाहिए
6. राजा दशरथ ने विद्या प्राप्ति के लिए पुत्रो को गुरुकुल भेज था अथार्थ पुत्रो को योग्य बनाने के लिए स्वयं से दूर भी करना पड़े तो करना चाहिए
7. संतान की याद में माँ बाप की भूख भी मर जाती है
8.बच्चो को हर परिस्थिति में जीने की शिक्षा देनी चाहिए क्या पता कब कैसा समय आ जाये
9.भिक्षुक को हमेशा भिक्षा अपरिचित से लेना चाहिए, अपनो से नही।

रामायण के दूसरे कथांश से सीखने वाली बातें :- 

1) योग हमारे जीवन में मन को एकाग्रचित्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है हम योगी होकर ही अपने अन्तर्मन को शरीर से बाहर रखकर अपने विकारो और अहंकार का आंकलन कर सकते है।
2) जब हम आराधना करते हैं तो पूरे चित्त से करे जैसे श्री राम शिव जी का अभिषेक कर रहे थे,,,,वे इतने लीन हो गये कि भगवान स्वयं भक्त की भक्ति में नटराज हो गये,,मनुष्य का नही पता परंतु भगवान सब देख रहे हैं ।
3) विश्वामित्र जैसे ऋषि उस काल के वैज्ञानिक अनुसंधान करते थे उन्होने कहा कि तप के बीच क्रोध वर्जित है इसलिए राक्षसों को श्राप नही दिया जा सकता,,अर्थात बिना किसी क्रोध और मन को विचलित किये बिना हमारे वैज्ञानिक भी कोरोना की दवाई ढूँढ सकते हैं । क्रोध तभी करे जब आवश्यकता हो जैसे विश्वामित्र जी ने दशरथ जी को उनका वचन याद दिलाने हेतु किया ।
4) एक गुरु विश्वामित्र को ऋषि वशिष्ठ की शिक्षा पर पूरा भरोसा है क्योकि उन्होने शिष्यो को दिए हुये ज्ञान का अंधविश्वास या रटन विद्या से नही अपितु स्वविवेक से प्रयोग करने को कहा।
5) तीन कर्तव्य महत्वपूर्ण बताये गुरु वशिष्ठ ने देवताओ के प्रति अर्थात हमारी आत्मा देवस्वरूप ,माता पिता के प्रति- इसलिये विश्वामित्र जी ने श्री राम को दशरथ जी से माँगा,,और गुरु के प्रति,,,,गुरु ने दीक्षा में परहित मांगा जो संसार की सबसे बड़ी गुरु दीक्षा है ।

हम इस रामायण से काफी कुछ सीख सकते हैं यदि चित्त से अपने जीवन में उतार ली जाये तो ✍


उक्त ब्लॉग में कुछ बातें श्री रजनीश दुबे जी की भी है। 🙏🏻


दूरदर्शन 'रामायण' दिखाने पर सहमत था किंतु तत्कालीन कांग्रेस सरकार इस पर आनाकानी कर रही थी। दूरदर्शन अधिकारियों ने जैसे-तैसे रामानंद सागर को स्लॉट देने की अनुमति सरकार से ले ली। ये सारे संस्मरण रामानंद जी के पुत्र प्रेम सागर ने एक किताब में लिखे थे। तो दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में रामायण को लेकर अंतर्विरोध देखने को मिल रहा था। सूचना एवं प्रसारण मंत्री बीएन गाडगिल को डर था कि ये धारावाहिक न केवल हिन्दुओं में गर्व की भावना को जन्म देगा अपितु तेज़ी से उभर रही भारतीय जनता पार्टी को भी इससे लाभ होगा।  हालांकि राजीव गांधी के हस्तक्षेप से विरोध शांत हो गया।

इससे पहले रामानंद को अत्यंत कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। वे दिल्ली के चक्कर लगाया करते कि दूरदर्शन उनको अनुमति दे दे लेकिन सरकारी घाघपन दूरदर्शन में भी व्याप्त था। घंटों वे मंडी हाउस में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतज़ार करते। कभी वे अशोका होटल में रुक जाते, इस आस में कि कभी तो बुलावा आएगा। एक बार तो रामायण के संवादों को लेकर डीडी अधिकारियों ने उनको अपमानित किया। ये वहीं समय था जब रामानंद सागर जैसे निर्माताओं के पैर दुबई के अंडरवर्ल्ड के कारण उखड़ने लगे थे। दुबई का प्रभाव बढ़ रहा था, जो आगे जाकर दाऊद इंडस्ट्री में परिवर्तित हो गया।

1986 में श्री राम की कृपा हुई। अजित कुमार पांजा ने सूचना व प्रसारण का पदभार संभाला और रामायण की दूरदर्शन में एंट्री हो गई। 25 जनवरी 1987 को ये महाकाव्य डीडी पर शुरू हुआ। ये दूरदर्शन की यात्रा का महत्वपूर्ण बिंदु था। दूरदर्शन के दिन बदल गए। राम की कृपा से धारावाहिक ऐसा हिट हुआ कि रविवार की सुबह सड़कों पर स्वैच्छिक जनता कर्फ्यू लगने लगा।

इसके हर एपिसोड पर एक लाख का खर्च आता था, जो उस समय दूरदर्शन के लिए बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। राम बने अरुण गोविल और सीता बनी दीपिका चिखलिया की प्रसिद्धि फिल्मी कलाकारों के बराबर हो गई थी। दीपिका चिखलिया को सार्वजनिक जीवन मे कभी किसी ने हाय-हेलो नही किया। उनको सीता मानकर ही सम्मान दिया जाता था।

अब नटराज स्टूडियो साधुओं की आवाजाही का केंद्र बन गया था। रामानंद से मिलने कई साधु वहां आया करते। एक दिन कोई युवा साधु उनके पास आया। उन्होंने ध्यान दिया कि साधु का ओरा बहुत तेजस्वी है। साधु ने कहा वह हिमालय से अपने गुरु का संदेश लेकर आया है। तत्क्षण साधु की भाव-भंगिमाएं बदल गई। वह गरज कर बोला ' तुम किससे इतना डरते हो, अपना घमंड त्याग दो। तुम रामायण बना रहे हो, निर्भिक होकर बनाओ। तुम जैसे लोगों को जागरूकता के लिए चुना गया है। हिमालय के दिव्य लोक में भारत के लिए योजना तैयार हो रही है। अतिशीघ्र भारत विश्व का मुखिया बनेगा।'

आश्चर्य है कि रामानंद जी को अपने कार्य के लिए हिमालय के अज्ञात साधु का संदेश मिला। आज इतिहास पुनरावृत्ति कर रहा है। उस समय जनता स्वयं कर्फ्यू लगा देती थी, आज कोरोना ने लगवा दिया है। उस समय दस करोड़ लोग इसे देखते थे, कल इससे भी अधिक देखेंगे। उन करोड़ों की सामूहिक चेतना हिमालय के उन गुरु तक पुनः पहुंच सकेगी। शायद फिर कोई युवा साधु चला आए और हम कोरोना से लड़ रहे इस युद्ध मे विजयी बन कर उभरे। कल चले राम बाण, और कोरोना का वध हो।

Thursday, 12 March 2020

5000 साल पहले #ब्राह्मणों_ने_हमारा_बहुत_शोषण किया ब्राह्मणों ने हमें पढ़ने से रोका
यह बात बताने वाले महान इतिहासकार यह नहीं बताते कि 500 #साल_पहले_मुगलों ने हमारे साथ क्या किया  100 #साल_पहले_अंग्रेजो_ने हमारे साथ क्या किया

हमारे देश में शिक्षा नहीं थी लेकिन 1897 में #शिवकर_बापूजी_तलपडे_ने_हवाई_जहाज बनाकर उड़ाया था मुंबई में जिसको देखने के लिए उस टाइम के हाई कोर्ट के जज महा गोविंद रानाडे और मुंबई के एक राजा महाराज गायकवाड के साथ-साथ हजारों लोग मौजूद थे जहाज देखने के लिए
 उसके बाद एक #डेली_ब्रदर_नाम_की_इंग्लैंड की कंपनी ने #शिवकर_बापूजी_तलपडे के साथ समझौता किया और बाद में बापू जी की मृत्यु हो गई यह मृत्यु भी एक षड्यंत्र है हत्या कर दी गई और फिर बाद में 1903 में राइट बंधु ने जहाज बनाया

आप लोगों को बताते चलें कि आज से हजारों साल पहले की किताब है #महर्षि_भारद्वाज_की_विमान_शास्त्र जिसमें 500 जहाज 500 प्रकार से बनाने की विधि है उसी को पढ़कर शिवकर बापूजी तलपडे ने जहाज बनाई थी।

लेकिन यह तथाकथित #नास्तिक_लंपट_ईसाइयों के दलाल जो है तो हम सबके ही बीच से लेकिन हमें बताते हैं कि भारत में तो कोई शिक्षा ही नहीं था कोई रोजगार नहीं था।

#अमेरिका_के_प्रथम_राष्ट्रपति_जॉर्ज_वाशिंगटन 14 दिसंबर 1799 को अरे थे सर्दी और बुखार की वजह से उनके पास बुखार की दवा  नहीं थी उस टाइम #भारत_में #प्लास्टिक_सर्जरी_होती थी और अंग्रेज प्लास्टिक सर्जरी सीख रहे थे हमारे गुरुकुल में अब कुछ वामपंथी लंपट बोलेंगे यह सरासर झूठ है।

तो वामपंथी लंपट गिरोह कर सकते है
#ऑस्ट्रेलियन_कॉलेज_ऑफ_सर्जन_मेलबर्न में #ऋषि_सुश्रुत_ऋषि की  प्रतिमा "फादर ऑफ सर्जरी" टाइटल के साथ स्थापित है।

महर्षि सुश्रुत – ये #शल्यचिकित्सा विज्ञान यानी सर्जरी के जनक व दुनिया के पहले शल्यचिकित्सक (सर्जन) माने जाते हैं। वे# शल्यकर्म या #आपरेशन में दक्ष थे। #महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखी गई ‘#सुश्रुतसंहिता’ ग्रंथ में शल्य चिकित्सा के बारे में कई अहम ज्ञान विस्तार से बताया है। इनमें सुई, चाकू व चिमटे जैसे तकरीबन 125 से भी ज्यादा शल्यचिकित्सा में जरूरी औजारों के नाम और 300 तरह की शल्यक्रियाओं व उसके पहले की जाने वाली तैयारियों, जैसे उपकरण उबालना आदि के बारे में पूरी जानकारी बताई गई है।
जबकि आधुनिक विज्ञान ने शल्य क्रिया की खोज तकरीबन चार सदी पहले ही की है। माना जाता है कि #महर्षि_सुश्रुत_मोतियाबिंद_पथरी_हड्डी_टूटना जैसे पीड़ाओं के उपचार के लिए शल्यकर्म यानी आपरेशन करने में माहिर थे। यही नहीं वे त्वचा बदलने की शल्यचिकित्सा भी करते थे।

भास्कराचार्य – आधुनिक युग में धरती की #गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया। #भास्कराचार्यजी ने अपने #‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के #गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’।

आचार्य कणाद – #कणाद #परमाणु की अवधारणा के जनक माने जाते हैं। आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी #जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले महर्षि कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं।
उनके अनासक्त जीवन के बारे में यह रोचक मान्यता भी है कि किसी काम से बाहर जाते तो घर लौटते वक्त रास्तों में पड़ी चीजों या अन्न के कणों को बटोरकर अपना जीवनयापन करते थे। इसीलिए उनका नाम कणाद भी प्रसिद्ध हुआ।

गर्गमुनि – गर्ग मुनि #नक्षत्रों के #खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार।
 ये #गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के बारे में नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ।  कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनिजी ने पहले बता दिए थे।

आचार्य चरक – ‘#चरकसंहिता’ जैसा महत्वपूर्ण आयुर्वेद ग्रंथ रचने वाले आचार्य चरक #आयुर्वेद विशेषज्ञ व ‘#त्वचा चिकित्सक’ भी बताए गए हैं। आचार्य चरक ने #शरीरविज्ञान, गर्भविज्ञान, औषधि विज्ञान के बारे में गहन खोज की। आज के दौर में सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग व क्षय रोग के निदान व उपचार की जानकारी बरसों पहले ही उजागर कर दी।

पतंजलि – आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ही #ऋषि पतंजलि ने कैंसर को भी रोकने वाला #योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है।

बौद्धयन – भारतीय #त्रिकोणमितिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। कई सदियों पहले ही तरह-तरह के आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाने की त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति #बौद्धयन ने खोजी। दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में बदलना, इस तरह के कई मुश्किल सवालों का जवाब बौद्धयन ने आसान बनाया।

15 साल साल पहले का 2000 साल पहले का मंदिर मिलते हैं जिसको आज के #वैज्ञानिक_और_इंजीनियर देखकर हैरान में हो जाते हैं कि मंदिर बना कैसे होगा अब #हमें_इन_वामपंथी_लंपट लोगो  से हमें पूछना चाहिए कि  मंदिर बनाया किसने

#ब्राह्मणों_ने_हमें पढ़ने नहीं दिया यह बात बताने वाले महान इतिहासकार हमें यह नहीं बताते कि सन 1835 तक भारत में 700000 गुरुकुल थे इसका पूरा डॉक्यूमेंट Indian house  में मिलेगा

भारत गरीब देश था चाहे है तो फिर दुनिया के तमाम आक्रमणकारी भारत ही क्यों आए हमें अमीर बनाने के लिए

भारत में कोई रोजगार नहीं था
भारत में पिछड़े दलितों को गुलाम बनाकर रखा जाता था लेकिन वामपंथी लंपट आपसे यह नहीं बताएंगे कि हम 1750 में पूरे दुनिया के व्यापार में भारत का हिस्सा 24 परसेंट था
और सन उन्नीस सौ में एक परसेंट पर आ गया आखिर कारण क्या था।

अगर हमारे देश में उतना ही छुआछूत थे हमारे देश में रोजगार नहीं था तो फिर पूरे दुनिया के व्यापार में हमारा 24 परसेंट का व्यापार कैसे था।

#यह_वामपंथी_लंपट यह नहीं बताएंगे कि कैसे अंग्रेजों के नीतियों के कारण भारत में लोग एक ही साथ 3000000 #लोग_भूख_से_मर गए कुछ दिन के अंतराल में

एक बेहद खास बात वामपंथी लंपट  या अंग्रेज दलाल कहते हैं इतना ही भारत समप्रीत था इतना ही सनातन संस्कृति समृद्ध थी तो सभी अविष्कार अंग्रेजों ने ही क्यों किए हैं भारत के लोगों ने कोई भी अविष्कार क्यों नहीं किया

#उन_वामपंथी_लंपट लोगों को बताते चलें कि किया तो सब आविष्कार भारत में ही लेकिन उन लोगों ने चुरा करके अपने नाम से पेटेंट कराया नहीं तो एक बात बताओ भारत आने से पहले अंग्रेजों ने कोई एक अविष्कार किया हो तो उसका नाम बताओ एवर थोड़ा अपना दिमाग लगाओ कि भारत आने के बाद ही यह लोग आविष्कार कैसे करने लगे उससे पहले क्यों नहीं करते थे।

Monday, 2 March 2020

तीन राज्यों में भाजपा को वोट न देकर हमने मोदी का अहंकार तोड़ दिया। ये हमने कोई पहली बार नहीं किया है, इसी तरह पहले भी हमने साथ न देकर बड़ों-बड़ों का अहंकार तोड़ा है..

बहुत पहले सिंध के हिन्दू राजा दाहिर का अहंकार तत्कालीन अफगानिस्तान और राजस्थान के हिन्दू राजाओं ने खत्म किया था। दाहिर ने सहायता के लिये पत्र लिखा, पर कोई भी नहीं आया। बहुत अहंकार था दाहिर को अपने पराक्रम का, मारा गया। अब ये अलग बात है कि उसके बाद सिंध में हिन्दुओं का निरंतर पतन ही होता रहा और आज अफगानिस्तान पूर्णतः इस्लामिक राष्ट्र है।

इसी तरह हमने मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय पृथ्वीराज चौहान का साथ न देकर उनके अहंकार को तोड़ा था। अब अलग बात है कि बाद में गोरी ने जयचंद को भी कुत्ते की मौत मारा।

मेवाड़ वालों को भी अपनी बहादुरी का बड़ा अहंकार था। जब खिलजी ने मेवाड़ घेर लिया तब पूरे राजपूताने से किसी ने भी साथ नहीं दिया, रावल रतन धोखे से मारे गये और पद्मावती को 16000 औरतों के साथ जौहर करना पड़ा। पद्मावती को भी अपनी सुंदरता पर बड़ा अहंकार था, तोड़ दिया।

राणा सांगा ने जब लोधी को कैद किया था, तब उनके अहंकार को तोड़ने के लिये डाकू बाबर को बुलाया गया। युद्ध में किसी ने राणा सांगा का साथ नहीं दिया, उनका सेनापति तीस हजार सैनिकों के साथ मारा गया, सांगा का अहंकार टूट गया। लेकिन लोधियों को भी मुगलों की गुलामी करनी पड़ी, मन्दिर तोड़े गए, स्त्रियां लूटी मुगलों ने..पर सांगा का अहंकार तो टूट ही गया न।

मराठे बड़े प्रतापी थे, मुगलों की वाट लगा दी थी उन्होंने। उनको भी बहुत अहंकार था। मुगल हार गये तो काफिरों को रोकने के लिए अफगानिस्तान से अब्दाली बुलाया गया, पानीपत के मैदान में सेनाएं सज गयीं। अब्दाली की सेना को तो रसद मिलती रही पर मराठों को किसी ने भी रसद नहीं भेजी..अहंकार जो तोड़ना था मराठों का। भूखे पेट मराठे लड़ते रहे, मरते रहे..हार गये। महाराष्ट्र का कोई ऐसा घर नहीं जिसका कोई बेटा शहीद न हुआ हो, लेकिन अहंकार तो टूट गया न।

न जाने कितनी बार हमने समय पर साथ न देकर अपनों के अहंकार को तोड़ा है, तो हम मोदी को भी सत्ता से हटा कर रहेंगे। भले ही हमें इसके लिये गोरियों, मुगलों, अब्दालियों या फिर इटली, पाकिस्तान की मदद लेनी पड़े और देश को उनके हाथों गिरवी रखना पड़े..हम मोदी का अहंकार तोड़ कर ही रहेंगे।

...... क्योंकि हमें ग़ुलामी में ही जीने की आदत पड़ गई है।