Friday, 25 September 2020

आदर्श युवा

एक बात मेरी समझ में कभी नहीं आई कि 
ये फिल्म अभिनेता (या अभिनेत्री) ऐसा क्या करते हैं कि इनको एक फिल्म के लिए 50 करोड़ 
या 100 करोड़ रुपये मिलते हैं?

सुशांत सिंह की मृत्यु के बाद यह चर्चा चली थी कि 
जब वह इंजीनियरिंग का टॉपर था तो फिर उसने फिल्म का क्षेत्र क्यों चुना?

जिस देश में शीर्षस्थ वैज्ञानिकों , डाक्टरों , इंजीनियरों , प्राध्यापकों , अधिकारियों इत्यादि को प्रतिवर्ष 10 लाख से 20 लाख रुपये मिलता हो, 
जिस देश के राष्ट्रपति की कमाई प्रतिवर्ष 
1 करोड़ से कम ही हो-
उस देश में एक फिल्म अभिनेता प्रतिवर्ष 
10 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक कमा लेता है। आखिर ऐसा क्या करता है वह?
देश के विकास में क्या योगदान है इन भड़वों का? आखिर वह ऐसा क्या करता है कि वह मात्र एक वर्ष में इतना कमा लेता है जितना देश के शीर्षस्थ वैज्ञानिक को शायद 100 वर्ष लग जाएं?

आज जिन तीन क्षेत्रों ने देश की नई पीढ़ी को मोह रखा है, वह है -  सिनेमा , क्रिकेट और राजनीति। 
इन तीनों क्षेत्रों से सम्बन्धित लोगों की कमाई और प्रतिष्ठा सभी सीमाओं के पार है। 

यही तीनों क्षेत्र आधुनिक युवाओं के आदर्श हैं,
जबकि वर्तमान में इनकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं। स्मरणीय है कि विश्वसनीयता के अभाव में चीजें प्रासंगिक नहीं रहतीं और जब चीजें 
महँगी हों, अविश्वसनीय हों, अप्रासंगिक हों -
तो वह देश और समाज के लिए व्यर्थ ही है,
कई बार तो आत्मघाती भी।

सोंचिए कि यदि सुशांत या ऐसे कोई अन्य 
युवक या युवती आज इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं तो क्या यह बिल्कुल अस्वाभाविक है? 
मेरे विचार से तो नहीं। 
कोई भी सामान्य व्यक्ति धन , लोकप्रियता और चकाचौंध से प्रभावित हो ही जाता है ।

बॉलीवुड में ड्रग्स या वेश्यावृत्ति, 
क्रिकेट में मैच फिक्सिंग, 
राजनीति में गुंडागर्दी  -  
इन सबके पीछे मुख्य कारक धन ही है 
और यह धन उन तक हम ही पहुँचाते हैं। 
हम ही अपना धन फूँककर अपनी हानि कर रहे हैं। मूर्खता की पराकाष्ठा है यह।

*70-80 वर्ष पहले तक प्रसिद्ध अभिनेताओं को     
 सामान्य वेतन मिला करता था। 

*30-40 वर्ष पहले तक क्रिकेटरों की कमाई भी 
  कोई खास नहीं थी।

*30-40 वर्ष पहले तक राजनीति भी इतनी पंकिल नहीं थी। धीरे-धीरे ये हमें लूटने लगे 
और हम शौक से खुशी-खुशी लुटते रहे। 
हम इन माफियाओं के चंगुल में फँस कर हम
अपने बच्चों का, अपने देश का भविष्य को
बर्बाद करते रहे।

50 वर्ष पहले तक फिल्में इतनी अश्लील और फूहड़ नहीं बनती थीं।  क्रिकेटर और नेता इतने अहंकारी नहीं थे - आज तो ये हमारे भगवान बने बैठे हैं। 
अब आवश्यकता है इनको सिर पर से उठाकर पटक देने की - ताकि इन्हें अपनी हैसियत पता चल सके।

एक बार वियतनाम के राष्ट्रपति 
हो-ची-मिन्ह भारत आए थे। 
भारतीय मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने पूछा -
" आपलोग क्या करते हैं ?"

इनलोगों ने कहा - " हमलोग राजनीति करते हैं ।"

वे समझ नहीं सके इस उत्तर को। 
उन्होंने दुबारा पूछा-
"मेरा मतलब, आपका पेशा क्या है?"

इनलोगों ने कहा - "राजनीति ही हमारा पेशा है।"

हो-ची मिन्ह तनिक झुंझलाए, बोला - 
"शायद आपलोग मेरा मतलब नहीं समझ रहे। 
राजनीति तो मैं भी करता हूँ ; 
लेकिन पेशे से मैं किसान हूँ , 
खेती करता हूँ। 
खेती से मेरी आजीविका चलती है। 
सुबह-शाम मैं अपने खेतों में काम करता हूँ। 
दिन में राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए 
अपना दायित्व निभाता हूँ ।"

भारतीय प्रतिनिधिमंडल निरुत्तर हो गया
कोई जबाब नहीं था उनके पास।
जब हो-ची-मिन्ह ने दुबारा वही वही बातें पूछी तो प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने झेंपते हुए कहा - "राजनीति करना ही हम सबों का पेशा है।"

स्पष्ट है कि भारतीय नेताओं के पास इसका कोई उत्तर ही न था। बाद में एक सर्वेक्षण से पता चला कि भारत में 6 लाख से अधिक लोगों की आजीविका राजनीति से चलती थी। आज यह संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है।

कुछ महीनों पहले ही जब कोरोना से यूरोप तबाह हो रहा था , डाक्टरों को लगातार कई महीनों से थोड़ा भी अवकाश नहीं मिल रहा था , 
तब पुर्तगाल की एक डॉक्टरनी ने खीजकर कहा था -
"रोनाल्डो के पास जाओ न , 
जिसे तुम करोड़ों डॉलर देते हो।
मैं तो कुछ हजार डॉलर ही पाती हूँ।"

मेरा दृढ़ विचार है कि जिस देश में युवा छात्रों के आदर्श वैज्ञानिक , शोधार्थी , शिक्षाशास्त्री आदि न होकर अभिनेता, राजनेता और खिलाड़ी होंगे , उनकी स्वयं की आर्थिक उन्नति भले ही हो जाए , 
देश की उन्नत्ति कभी नहीं होगी। सामाजिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक, रणनीतिक रूप से देश पिछड़ा ही रहेगा हमेशा। ऐसे देश की एकता और अखंडता हमेशा खतरे में रहेगी।

जिस देश में अनावश्यक और अप्रासंगिक क्षेत्र का वर्चस्व बढ़ता रहेगा, वह देश दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाएगा। 
देश में भ्रष्टाचारी व देशद्रोहियों की संख्या बढ़ती रहेगी, ईमानदार लोग हाशिये पर चले जाएँगे व राष्ट्रवादी लोग कठिन जीवन जीने को विवश होंगे।

 सभी क्षेत्रों में कुछ अच्छे व्यक्ति भी होते हैं। 
उनका व्यक्तित्व मेरे लिए हमेशा सम्माननीय रहेगा ।
आवश्यकता है हम प्रतिभाशाली,ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, समाजसेवी, जुझारू, देशभक्त, राष्ट्रवादी, वीर लोगों को अपना आदर्श बनाएं।

नाचने-गानेवाले, ड्रगिस्ट, लम्पट, गुंडे-मवाली, भाई-भतीजा-जातिवाद और दुष्ट देशद्रोहियों को जलील करने और सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूप से बॉयकॉट करने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी हमें।

यदि हम ऐसा कर सकें तो ठीक, अन्यथा देश की अधोगति भी तय है।

Sunday, 13 September 2020

बेरोजगार युवा

आइये मिलकर बढ़ती बेरोज़गारी के कारणों पर एक नज़र डालें... 
आज के युवाओं की समस्या

किसी बेरोज़गार से सवाल करो...
1. मजदूरी  करोगे....? 
    - नहीं
2. दुकान पर काम करोगे..? 
    - नहीं
3. बाइक / कार का काम जानते हो..?
    - नहीं
4. बिजली मैकेनिक बनोगे...?
    - नहीं
5. पेंटिंग का काम आता है..?
    - नहीं
6. मिठाई बनाना जानते हो...? 
    - नहीं
7. प्राइवेट कंपनी में काम करोगे? 
     - नहीं... 
8. मूर्तियां, मटके, हस्तशिल्प वगैरह कुछ बनाना आता है? 
     - नहीं.
9. तुम्हारे पिता की ज़मीन है?
     - हाँ.
10. तो खेती करोगे ?
     - नहीं!!!! 

ऐसे 10 - 20 प्रश्न और पूछ लो जैसे - सब्ज़ी बेचोगे ? फ़ेरी लगाओगे? प्लम्बर, बढ़ई / तरखान, माली / बागवान, आदि का काम सीखोगे ??
      - सब का जवाब ना में ही मिलेगा।।

फिर पूछो...
11. भैया किसी  कला मे निपुण तो होगे...?
    - नहीं।। पर मैं B. A. पास हूँ , M.A. पास हूँ I    
      डिग्री है मेरे पास।।
12. बहुत अच्छी बात है पर कुछ काम जानते हो ? कुछ तो काम आता होगा सैकड़ों की संख्या में काम है ?
    - नहीं.  काम तो कुछ नहीं आता I😇

बताओ अब ऐसे युवा बेरोज़गार सिर्फ हमारे ही देश में क्यूँ है?
 क्योंकि हमारा युवा दिखावे की जिंदगी जीने का आदी हो गया है l यहां सबको कुर्सी वाली नौकरी चाहिए जिसमें कोई काम भी ना करना पड़े l ऐसा युवा सच में देश के लिए अभिशाप ही है l जहां अपनी आजीविका के लिए भी काम करने से हिचकिचाता है l
शर्म आनी चाहिए खुद की कमजोरी को बेरोजगारी का नाम देते हुए l
हर साल लाखों बच्चे डिग्री लेके निकलते है पर सच कहूँ तो सब के हाथ में काग़ज़ का टुकड़ा होता है हुनर नहीं l जब तक आप खुद में कुछ हुनर पैदा करके उसको आजीविका अर्जन में प्रयोग मे नहीं लाते तब तक ख़ुद को बेरोजगार कहने का हक़ नहीं है किसी का भी l
रही बात सरकारों की ये तो आती रहेंगी जाती रहेंगी कोई भी सरकार 100% सरकारी रोज़गार नहीं दे सकती l तो मेरे प्यारे देशवासियों, समय रहते भ्रामक दुनिया से निकलने का प्रयत्न करो और अपनी काबिलीयत के अनुसार काम करना शुरू करो l अन्यथा जीवन बहुत मुश्किल भरा हो जाएगा l
जापान और चाइना जैसे देशों में छोटा सा बच्चा अपने खर्च के लिए कमाने लग जाता है l और हम यहां 25-26 साल का युवा वर्ग केवल सरकारों की आलोचना करके समय की बर्बादी कर रहा है l कुछ नहीं होने वाला इनसे। कितने भी आंदोलन कर लीजिए किसी सरकार को कुछ फर्क़ नहीं पड़ने वाला l अंततः परिश्रम अपने आप को ही करना पड़ता है l 
किस्मत रही तो आपको भी जरूर सरकारी नौकरी मिलेगी l लेकिन सिर्फ इसके भरोसे मत बैठो l

Thursday, 10 September 2020

कंगना रनौत

जो कंगना राणावत कल तक एक फिल्मी कलाकार थी वो आज पूरे देश में राष्ट्रवाद और सनातन धर्म की आवाज बुलन्द करने वाली शेरनी बन गई है, केवल एक फिल्म में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का किरदार निभाने से ही किसी के अंदर देश धर्म और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की इतनी हिम्मत आ गई सोचो यदि 1947 के बाद से हमारे देश के बच्चों को किताबों हमारे महान पूर्वजों और सभ्यता व संस्कृति तथा सनातन धर्म की शिक्षा पढ़ाई गई होती, तो आज भारत के हर घर से राष्ट्रभक्त निकलते परंतु अफसोस यह है कि सत्ता में बैठे मुगलों की नाजायज औलादों ने हमे उनके बाप दादाओं के कुकर्मों के बारे में ही पढ़ाया, तथा फ़िल्मों ओर नाटकों में साधु को पाखंडी ठाकुर को बलात्कारी ओर सरदारों को बेवक़ूफ़ बताया गाया जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत जैसे सनातन धर्म का मज़ाक़ बनने लगा ओर हम हिंदू भी इसे बेवक़ूफ़ों की तरह बस मनोरंजन समझ कर देखने लग गये जिसका परिणाम आज आपके सामने है, अब भी समय है सत्य को पहचाने । “one women army” 🔥

Wednesday, 9 September 2020

सरकारी का निजीकरण


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आप सुबह उठकर चप्पल पहनते हैं। वह निजी कम्पनी ने बनाया है।

फिर शौचालय जाते हैं, वह भी किसी निजी क्षेत्र ने ही बनाया है।

अब आप साबुन/ हैंडवाश से हाथ धोते हैं, वह भी निजी क्षेत्र ने बनाया है।

अब आप ब्रश उठाते हो और उस पर मंजन लगाते हो, वह भी निजी क्षेत्र ने बनाया है। 

अब आप बाहर निकलते हैं और तौलिये से मुंह पोछते हैं और सोफे/ कुर्सी पर बैठते है, यह भी निजी क्षेत्र ने बनाया है। 

इसके बाद अब आप मोबाईल चलाते हैं और तीव्र गति से फेसबुक देख रहे होते हैं, यह सब भी निजी क्षेत्र ने बनाया है।

अब आपकी पत्नी आपके लिये नाश्ता बना रही हैं, जो निजी क्षेत्र का ही है।

जिस बर्तन में परोसा गया और जिस बार से उसे धोया गया और धुलने के लिये जिसको रखा भी गया, वह सब भी निजी क्षेत्र के है।

अब आप नहाने जाते हैं और शैम्पू, बाडी वाश, रेजर का इस्तेमाल करते हैं, सब भी निजी क्षेत्र का है।

नहाने के बाद आप जो तेल, क्रीम, पाउडर, कंघा आदि इस्तेमाल करते हैं, वह सब भी निजी क्षेत्र का है।

उसके बाद आप जो कपड़े, बेल्ट, टाई, पर्स पहनते हैं, वह भी निजी क्षेत्र का है।

अब आप अपने गाड़ी, कार आदि को स्टार्ट करते हैं या फिर आटो, टेम्पो, रिक्सा पकड़ते हैं, वह भी निजी क्षेत्र का है। 

अब आप उन 1% लोगों में नहीं हैं, जो सरकारी नौकर हैं, तो आप जिस गली, मुहल्ले, दुकान, माल, आफिस में जा रहे हैं, वह भी निजी क्षेत्र का है।

आप दोपहर में जो टिफ़िन लेकर गये थे खाने के लिये, वह भी निजी क्षेत्र का है। 

दोपहर के बाद आप थोड़ा चाय सिगरेट काफी के लिये कार्यालय के बाहर आते हैं, वह भी निजी क्षेत्र का है।

अब संध्या हो आयी है, घर लौट रहे है, उसी निजी क्षेत्र के वाहन से...

घर में टीवी देख रहे हैं, कोई चैनल लगाया, पंखा चलाया, थकान मिटाई, यह सब निजी क्षेत्र का है। 

अभी अभी दूध वाले ने आवाज लगाई, कपड़े धोने वाला कपड़ा लेकर आया, यह सब निजी क्षेत्र के हैं। 

अब आप अपने बच्चो के साथ बैठे हैं, बच्चो को चकित करने के लिये आपने अचानक कुछ चाकलेट और खिलौने निकाले, यह सब निजी क्षेत्र के हैं। 

अब आप अपनी  पत्नी के साथ बच्चो कोलेकर जिस टेबल कुर्सी पर बैठकर खा रहे हैं, वह भी निजी क्षेत्र का है।

अब 09 बज चुके हैं। आप ने गलती से NDTV लगा दिया वहा रवीश कुमार प्रकट हुए, वह भी निजी क्षेत्र के हैं।

उन्होने बताया की मोदी निजीकरण करके देश बेच रहे हैं। 😂

अब आप अपने निजी पत्नी के साथ निजी क्षेत्र द्वारा बनाये बिस्तर और पलंग पर बैठकर इस निजीकरण से बेहद चिंतित हैं। आपकी रातों की नींद गायब है। 

ईश्वर आप का कल्याण करें।
 
सरकारों का काम नहीं है उद्योग चलाए, जो पूंजी लगा रहा है उसे ही उद्योग चलाने दे, दर्द उसे ही है जिसका कुछ अपना लगा हुआ है l

इस प्रेषिका (पोस्ट) को आप गर्व से विनिमय (शेयर ) करें ताकि जन जन तक मेरा ये संदेश पहुंचे और  इस प्रेषिका (पोस्ट) की सार्थकता सिद्ध हो ....

✍️✍️

Sunday, 6 September 2020

कोरोना महामारी

अगले 15 दिन कोरोना के संक्रमण में बेहद खराब होने वाले हैं। पॉजिटिव कैसे बढ़ेंगे। भारत पीक की ओर बढ़ रहा है। इंदौर में सब खोल दिया गया है और अब इस महामारी के फैलने की प्रोबेबिलिटी बेहद बढ़ गई है। 

आप सभी की जानकारी के लिए बता दूं कि इंदौर के सभी प्राइवेट हॉस्पिटल्स भरे हुये हैं। जी हां यह आपके लिए चेतावनी है। आप लाखों रुपये देकर भी बेड/ ICU नही जुगाड़ पाएंगे यह तथ्य है इंदौर का। और कड़वा सच यह भी है कि आप MY हॉस्पिटल में भर्ती होने का साहस भी नही जुटा पाएंगे। 

अब अच्छा यही है कि आप पूर्ण सावधानी, मास्क पहनना और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें और बीमार न पड़े यही सबसे बड़ा इलाज है। 

अभी संक्रमण का दौर मध्यम वर्गीय और उच्च वर्गीय परिवारों, ऑफिस, संस्थानों में हैं और उन नई जगहों में है जहां कभी कोई हिस्ट्री नही रही। ऐसे ऐसे  परिवार और जगहों से कैसे आ रहे हैं जिनके बारे में।आप।सोच नही सकते। नेताओं का, अधिकारियों और व्यापारी इसकी गिरफ्त में हैं। जिसकी भी जांच हो रही है वह पॉजिटिव निकल रहा है। यदि ये बढ़ता रहा और आपको स्वास्थ्य सुविधा न मिली तो सोचिए क्या होगा। 

यदि आप बीमार हुए तो ध्यान रखिये होम आइसोलेशन के अलावा कोई चारा नही, वैक्सीन तो अगले साल के पहले नही आ रही। 

सिर्फ दो इंजेक्शन Remdesivir जैसे जिनकी भी बेहद शॉर्टेज है , इतनी कि मारामारी, ब्लैक सब चल रहा है, कुछ भी करने पर अस्पताल में पलंग की जुगाड़ भी न हो पाएगी। 

आज डॉ निशांत खरे साहब से चर्चा के दौरान भी यही बात सामने आई कि अगले 15 दिन बेहद चुनौतियों से भरे हैं । 50-55 से 250-300 तक तो आ ही गए हैं रोज़ाना के केसेस। 

भारत तेज़ी से संक्रमण के दौर में है। आपकी जरा सी भूल और असावधानी न सिर्फ आपको बल्कि घर के सभी सदस्यों पर भारी पड़ेगी। 

शहरी खाने , प्रदूषित हवा पानी, धूप न मिलना, AC की हवा ने आपकी इम्युनिटी तो पहले ही निचले स्तर पर ला दी है। 

अब सिर्फ 2 तरीके हैं, 1) मास्क हमेशा पहनना है, बात करते वक्त भी 2) फिजिकल डिस्टेंसिंग बनाये रखें, घर और ऑफिस दोनों में। 

बेहद चौंकाने वाले आंकड़े भारत से मिल रहे हैं अब रोज़ 90 हजार का आंकड़ा छू लिया है हमने। दुनिया में दूसरे नंबर पर है भारत कोरोना में। ज्यादा देर नही हम नम्बर 1 हो जाएं। आर्थिक कारणों से आपका बाहर निकलना अत्यंत आवश्यक हो सकता है पर लापरवाही आपके आर्थिक, सामाजिक दोनों जीवन को हिलाकर रख देगी। इसलिए ऐसे जिये जैसे रस्सी पर नट चलता है। 

चेतिये इसके पहले देर हो जाये।