Saturday, 18 July 2020

zest Square Electronics Fraud Business

दोस्तों आज आपसे एक फ्राड इंस्टाग्राम एकाउंट की बात कर रहा हूँ जो पूरी तरह से फ़र्ज़ी है वहाँ लोगो को नए नए ब्रांड के मोबाइल फोन को सस्ते में बेचने के नाम पर लोगो से ठगी की जा रही है। 

वर्तमान में उस एकाउंट द्वारा लगभग 260 लोगों से लाखों रुपये ली ठगी कर ली है। 

इनका पूरा टीम दिल्ली मुम्बई बेंगलुरू गुजरात मे फैला हुआ है जो ऑनलाइन मोबाइल के नकली बिल दिखाकर व दुसरो की पोस्ट फ़ोटो दिखा कर ठगी कर रहे है ऐसे लोगो से सावधान रहें

#ZestSquareElectronics 


वर्तमान में एकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है। परंतु सावधान रहें 
ऐसी कोई भी लालच में आकर ऐसे लुटेरों के वश में न आये 

धन्यवाद जय हिंद

Thursday, 16 July 2020

भगवान की आरती विधि

आरती का अर्थ, विधि तथा महत्व :

व्याकुल होकर भगवान को याद करना, स्तवन करना।

आरती, पूजा के अंत में धूप, दीप, कर्पूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। हिंदू धर्म में अग्नि को शुद्ध माना गया है। पूजा के अंत में जलती हुई लौ को आराध्य देव के सामने

एक विशेष विधि से घुमाया जाता है।

इसमें इष्टदेवता की प्रसन्नता के लिए दीपक दिखाने के साथ ही उनका स्तवन और गुणगान भी किया जाता है। यह उपासक के हृदय में भक्ति दीप प्रज्वलित करने और ईश्वर का आशीर्वाद ग्रहण करने का सुलभ माध्यम है।

आरती चार प्रकार की होती है

दीप आरती

जल आरती 

● धधूप, कपूर, अगरबत्ती से आरती 

पुष्प आरती

दीप आरती :- दीपक लगाकर आरती का आशय है, हम संसार के लिए प्रकाश की प्रार्थना करते हैं।

जल आरती :- जल जीवन का प्रतीक है। आशय है कि हम जीवन रूपी जल से भगवान की आरती करते हैं।

धूप,कपूर, अगरबत्ती से आरती:- धूप, कपूर और अगरबत्ती सुगंध का प्रतीक है। यह वातावरण को सुगंधित करते हैं तथा हमारे मन को भी प्रसन्न करते हैं।

पुष्प आरती :- पुष्प सुंदरता और सुगंध का प्रतीक है। अन्य कोई साधन न होने पर पुष्प से भी आरती की जाती है।

आरती एक विज्ञान है। आरती के साथ – साथ ढोल, नगाड़े, तुरही, शंख, घंटा आदि वाद्य भी बजते हैं। इन वाद्यों की ध्वनि से रोगाणुओं का नाश होता है। वातावरण पवित्र होता है। दीपक और धूप की सुगंध से चारों ओर सुगंध का फैलाव होता है। पर्यावरण सुगंध से भर जाता है।

आरती के पश्चात मंत्रों द्वारा हाथों में फूल लेकर भगवान को पुष्प समर्पित किए जाते हैं तथा प्रार्थना की जाती है।

पूजा में आरती का इतना महत्व क्यों हैं इसका जवाब स्कंद पुराण में मिलता है। पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता

पूजा की विधि नहीं जानता लेकिन सिर्फ आरती कर लेता है तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं।

आरती करते हुए भक्त के मन में ऐसी भावना होनी चाहिए, मानो वह पंच-प्राणों की सहायता से ईश्वर की आरती उतार रहा हो।
घी की ज्योति जीव के आत्मा की ज्योति का प्रतीक मानी जाती है। यदि भक्त अंतर्मन से ईश्वर को पुकारते हैं, तो यह पंचारती कहलाती है। आरती प्रायः दिन में एक से पांच बार की जाती है। इसे हर प्रकार के धार्मिक समारोह एवं त्यौहारों में पूजा के अंत में करते हैं।


आरती करने का समय :

1- मंगला आरती
2- शृंगार आरती
3- राजभोग आरती
4- संध्या आरती
5- शयन आरती

1- मंगला आरती :

यह आरती भगवान् को सूर्योदय से पहले उठाते समय करनी चाहिए।

2- श्रृंगार आरती :

यह आरती भगवान् जी की पूजा करने के बाद करनी चाहिए।

3- राजभोग आरती :

यह आरती दोपहर को भोग लगाते समय करनी चाहिए और भगवान् जी की आराम की व्यवस्था कर देनी चाहिए।

4- संध्या आरती :

यह आरती शाम को भगवान् जी को उठाते समय करनी चाहिए।

5- शयन आरती :

यह आरती भगवान् जी को रात्री में सुलाते समय करनी चाहिए।
एक पात्र में शुद्ध घी लेकर उसमें विषम संख्या (जैसे 3, 5 या 7) में बत्तियां जलाकर आरती की जाती है। इसके अलावा कपूर से भी आरती कर सकते हैं। सामान्य तौर पर पांच बत्तियों से आरती की जाती है, जिसे पंच प्रदीप भी कहते हैं।
आरती पांच प्रकार से की जाती है। पहली दीपमाला से, दूसरी जल से भरे शंख से, तीसरी धुले हुए वस्त्र से, चौथी आम और पीपल आदि के पत्तों से और पांचवीं साष्टांग अर्थात शरीर के पांचों भाग (मस्तिष्क, हृदय, दोनों कंधे, हाथ व घुटने) से
पंच-प्राणों की प्रतीक आरती मानव शरीर के पंच-प्राणों की प्रतीक मानी जाती है
आरती की थाली या दीपक को ईष्ट देव की मूर्ति के समक्ष ऊपर से नीचे, गोलाकार घुमाया जाता है। इसे घुमाने की एक निश्चित संख्या भी हो सकती है व गोले के व्यास भी कई हो सकते हैं।
इसके साथ आरती गान भी समूह द्वारा गाया जाता है (कई जगह गान गाने का विधान नहीं मिलता)। जिसको संगीत आदि की संगत भी दी जाती है। आरती होने के बाद पंडित या आरती करने वाला आरती के दीपक को उपस्थित भक्त-समूह में घुमाता है,
लोग अपने दोनों हाथों को नीचे को उलटा कर जोड़ लेते हैं व आरती पर घुमा कर अपने मस्तक को लगाते हैं। इसके दो कारण बताये जाते हैं।
एक मान्यता के अनुसार ईश्वर की शक्ति उस आरती में समा जाती है, जिसका अंश भक्त मिल कर अपने अपने मस्तक पर ले लेते हैं। दूसरी मान्यता के अनुसार ईश्वर
की नजर उतारी जाती है, या बलाएं ली जाती हैं व भक्तजन उसे इस प्रकार अपने ऊपर लेने की भावना करते हैं, जिस प्रकार एक मां अपने बच्चों की बलाएं ले लेती है। ये सांकेतिक होता है, असल में जिसका उद्देश्य ईश्वर के प्रति अपना समर्पण व प्रेम जताना होता है।

🙏🌹हर हर महादेव🌹🙏🏻

Tuesday, 7 July 2020

नेहरू की सच्चाई

मैं अपनी यह बहुत पहले लिखी पोस्ट फिर से पोस्ट कर रहा हूं क्योंकि एक मित्र एक पोस्ट पर बहस कर रहे हैं कि नेहरू को सिर्फ पहिया मिला था नेहरू ने मेहनत से उसे स्कूटर बनाया

कांग्रेसी और वामपंथी इतिहासकारों ने एक साजिश के तहत ये झूठ फैलाया है की नेहरु आधुनिक भारत के निर्माता है .... सच्चाई ये है की अंग्रेजो ने नेहरु को एक तेज रफ्तार में चलती गाड़ी का स्टीयरिंग थमाया था ..

भारत में पहला छोटा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट अंग्रेजो ने दार्जिलिंग में 1897 में बनाया था जो 130 किलो वाट का था .. भारत में पहला बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट मैसूर के राजा ने कोलर के खान से सोना निकालने के लिए कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम फाल पर 1887 में बनाया जो 1902 में पूरा हुआ .. ये 6 मेगावाट का था .. इसका ठेका अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक को दिया गया था .. शीप से टरबाइन और अन्य साजोसामान आये फिर उन्हें सैकड़ो हाथियों पर लादकर साईट तक ले जाया गया था ..
आजादी तक भारत में कुल 230 छोटे बड़े पॉवर प्रोजेक्ट कार्यरत थे जिसमे कई कोयला आधारित थर्मल प्रोजेक्ट भी थे ..
दोराबजी टाटा ने 1910  में ही टाटा पावर नामक कम्पनी बनाई थी ... दोराबजी ने टाटा पॉवर द्वारा 1915 में महाराष्ट्र के खोपोली ने 72 मेगावाट का विशाल पावर प्रोजेक्ट बनाया .. टाटा पावर ने 1947 तक भारत में 23 बड़े पॉवर प्रोजेक्ट बना चुकी थी और बम्बई, दिल्ली और कोलकाता में इलेक्ट्रिक डिस्ट्रीब्यूशन नेट्वर्क बना चुकी थी 
भारत के हैदराबाद,  बीकानेर, जोधपुर, बडौदा, ग्वालियर सहित तमाम रियासतों ने अपने राज्यों में कई पॉवर प्रोजेक्ट बनवाये थे .. 
आपको जानकर आश्चर्य होगा की 1947 तक चीन भारत से पॉवर, रेल, सडक तथा सेना आदि तमाम क्षमताओ में काफी पीछे था .. 
अंग्रेजो ने नेहरु को चाय और काफी के विशाल बगान बनाकर दिए थे .. उन बागानों तक जो काफी दुर्गम पहाड़ो पर थे वहां अंग्रेजो ने सिचाई, रेल, सड़क आदि इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किये थे ..
अंग्रेजो ने नेहरु को बीस विशाल बंदरगाह और 23 एयरपोर्ट बनाकर दिए थे .. 
अंग्रेजो ने भारत के हर इलाको में आधुनिक युनिवर्सिटी और कालेज खोले .. मद्रास दिल्ली मुंबई करांची में सेंट स्टीफ़न कोलेज, सियालकोट में मरे कोलेज, अजमेर में मेयो कालेज सहित पुरे भारत में 350 कालेज और 23 युनिवर्सिटी अंग्रेजो ने नेहरु को दिया था ..
• Serampore College: हावड़ा  Estd.: 1818.
• Indian Institute of Technology, Roorkee: Estd.: 1847.
• University of Mumbai: Estd.: 1857.
• University of Madras: Estd.: 1857.
• University of Calcutta: Estd.: 1857.
• Aligarh Muslim University: Estd.: 1875.
• Allahabad University: Estd-1887
• पंजाब विश्वविद्यालय – 1882 
• बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय -1916, युनिवर्सिटी ऑफ़ मैसूर -1916, पटना युनिवर्सिटी, नागपूर युनिवर्सिटी काशी विद्यापीठ सहित 49 बड़े विश्वविद्यालय थे .. 1947 तक भारत शिक्षा संस्थानों में तीसरे नम्बर पर था .
अंग्रेजो ने नेहरु को विशाल सेना दी थी .. ब्रिटिश इंडियन आर्मी 1895 में स्थापित हुई थी .. अंग्रेज आठ कमांड बनाकर गये थे जिसमे 2 पाकिस्तान में चले गये .. ब्रिटिश इंडियन आर्मी प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में बहादुरी से लड़ी थी .. अंग्रजो ने नेहरु को 45 सैनिक छावनियां और विशाल रोयल एयरफोर्स दिया था .. भारत विश्व में तीसरा देश था जिसने वायुसेना बनाया .. यानी चीन के पहले ही अंग्रेजो ने भारत को विशाल और आधुनिक वायुसेना बनाकर दी थी ..

आज देश में जितना भी रेलवे नेट्वर्क है उसका 67% 1947 तक बन चूका था .. भारत का ये विशाल रेल नेट्वर्क नेहरु का नही बल्कि अंग्रेजो का देन है .. उन्होंने विशाल नदियों पर पुल बनाये दुर्गम पहाड़ो को काटकर रेल लाइन बनाई .. भारत विश्व में चौथा देश और एशिया का पहला देश है जहाँ रेल चली .. भारत में 1853 को रेल चली .. जबकि इसके 30 साल बाद चीन में रेल चली ..

भारत में पहली लिफ्ट ओटिस कम्पनी ने 1890 में मैसूर पैलेस में लगाया था ...भारत में विशाल चाय बागन और सागौन के लकड़ी के बागान लगाने वाली कम्पनी पारसी वाडिया खानदान की थी जिसका नाम था बाम्बे बर्मा ट्रेडिंग कम्पनी लिमिटेड .. ये कम्पनी 1863 में बनी थी ..और एशिया की बड़ी कम्पनी थी ..

1865: ALLAHABAD BANK
1892: BRITANNIA INDUSTRIES LTD
1895: PUNJAB NATIONAL BANK
1897: CENTURY TEXTILES AND INDUSTRIES LTD
1897: GODREJ AND BOYCE MANUFACTURING CO. LTD
1899: CALCUTTA ELECTRICITY SUPPLY CORPORATION
1902: SHALIMAR PAINT COLOUR AND VARNISH CO.
1903: INDIAN HOTELS CO. LTD
1908: BANK OF BARODA
1911: TVS
1904: KUMBAKONAM BANK LTD
1905: PHOENIX MILLS LTD
1906: CANARA BANKING CORP. (UDIPI) LTD
1906: BANK OF INDIA
1907: ALEMBIC PHARMACEUTICALS LTD
1907: TATA STEEL LTD सहित चार सौ से ज्यादा बड़ी कम्पनियां 1947 में पहले बन चुकी थी ..और 80 से ज्यादा बैंक थे 

यानी चाहे शिक्षा हो या बैंकिग हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर हो या रेलवे हो या उर्जा हो .. 1947 तक भारत हर फिल्ड में टॉप पर था .. फिर भी कांग्रेसी कहते है की नेहरु आधुनिक भारत के निर्माता है .. कांग्रेसी इस तरह से प्रचारित करते है जैसे 1947 तक भारत एकदम पिछड़ा था .. कोई स्कुल तक नही था .. लोग लालटेन युग में जीते थे .. फिर नेहरु आये और मात्र 2 सालो में भारत को आधुनिक बना दिया