Saturday, 29 June 2019

मेरे लिए ये मायने नहीं रखता कि कौन हिंदू है या कौन मुस्लिम। मैं किसी से पूछता भी नहीं हूँ कि भाई ! तुम हिंदू हो या मुस्लिम। इसी प्रकार मेरे लिए ये भी मायने नहीं रखता कि कौन फारवर्ड या कौन बैकवर्ड।
                 किसी की जाति-धर्म के बारे में जानने की इच्छा मेरे अंदर बिलकुल नहीं रहती है। किसी कारणवश पता चल जाये तो वह अलग बात है।
          मेरे लिए कोई भी इंसान कैसा है? मतलब उसका स्वभाव कैसा है,विचार कैसा है, उसके गुण क्या-क्या हैं इत्यादि,मायने रखता है। मुझे किसी के रंग-रूप,जाति-धर्म,देश-प्रदेश से कोई लेना-देना नहीं है।
         वास्तव में मुझे व्यक्ति के बुराई से नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ अच्छाई से लेना-देना है। जहाँ अच्छाई है ; जिसके अंदर अच्छाई है,जितनी मात्रा में है,उतनी ही मात्रा में,वहाँ मेरा प्रेम बसता है; उनके लिए मेरा दिल धड़कता है ; उनके लिए मैं कुछ करने की कोशिश करता हूँ।
           मैं बुराई या बुरी नीति का प्रबल विरोधी हूँ। यह जितनी मात्रा में जिस व्यक्ति के अंदर या जिस जगह पायी जाती है मैं उतना ही उससे नफरत करता हूँ। दरअसल,मैं बुराई या बुराई से संबंधित तमाम चीजों का सर्वनाश चाहता हूँ। चाहता हूँ कि सारा आलम अच्छाई से भरा हो।
              मैं जैसा चाहता हूँ वैसा होगा कि नहीं,ये बाद कि बात है। लेकिन इतना तय है कि मैं जैसा चाहता हूँ वैसा करने का प्रयास जरूर करूँगा। पूरा नहीं तो कुछ-न-कुछ अवश्य सही कर दूँगा।
            अक्सर लोग मुझे देखकर धोखा खा जाते हैं। वे सोचते हैं कि मैं कट्टर सवर्णवादी हूँ, लेकिन उन्हें मैं कहना चाहता हूँ कि जैसा आप सोचते हैं वैसा बिलकुल नहीं है। मैं आपको बता दूँ कि "मैं दलित भाई-बहनों या मित्रों से भी उतना ही प्रेम करता हूँ जितना सवर्ण भाई-बहनों या मित्रों से।" बल्कि एक कदम आगे बढ़कर कहूँ तो "मेरे लिए ये मायने ही नहीं रखता कि कौन दलित है और कौन सवर्ण। " अगर कोई अच्छा इंसान है तो फिर बात ही ख़त्म हो गयी। फिर चाहे वह दलित हो,सवर्ण हो,हिंदू हो या मुस्लिम हो,मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। अच्छे इंसान मेरे दिल में बसते हैं।
 वे सदैव आनंदित  रहें मैं यही चाहता हूँ।
            मैं चाहता हूँ कि हर जगह से; हर इंसान के अंदर से बुराइयाँ समाप्त हों और हर जगह; हर इंसान के भीतर अच्छाइयों का वास हो। हर जगह प्रेमपूर्ण वातावरण हो; सद्भाव हो।
मेरी दुश्मनी या नफ़रत सार्वधिक उन लोगों से हैं जो अपने निजी स्वार्थ या संस्था के लिए देश में रहकर देश से ग़द्दारी करते हैं। सेना पर पत्थर फेंकते हैं। या इस राष्ट्र को सम्मान तक नही देते अभी हाल ही मैं एक सांसद ने वन्दे मातरम् को लेकर बयान दिया की वो इस्लाम में हराम हैं। दरसल ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जो इस्लाम में हराम का नाम लेकर अन्य मुस्लिम भाइयों को भी बहला फुसला कर उनसे भी राष्ट्र का विरोध करवाते हैं।
आपका नितिन ..!

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