Monday, 20 May 2019

ये बात तो चीख चीखकर बतायी जाती है कि "गोडसे ने गांधी को मारा" लेकिन "क्यों मारा" ये नहीं बताया जाता। किसी को पता हो तो बताने का कष्ट करें?
क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?
क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को … पुणे के ब्राह्मणों के साथ ? क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?
क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l
यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस पंडित नाथूराम गोडसे जी का कर्ज….
आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ….
पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं। अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए
रेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,,” आज़ादी का तोहफा ” रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की… भयानक बदबू……

सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी … बलात्कार किये बिना…..?

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी….

डॉक्टर ने पूछा क्यों ???

उन महिलाओं ने जवाब दिया… हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?

हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं…उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे।

“आज़ादी का तोहफा”

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह था…क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l

विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे….और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए…..पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाउगा….एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l

दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए… क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में

दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई

ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं…

जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि… तुम हिन्दू हो….

4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं…. ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ?? यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर … कितना महान …

जिसने बिना तलवार उठाये … 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया

2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l

10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद

ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो …

परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं …वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल

विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र …

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आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि … परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l

और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए… क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया… या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l

परन्तु ऐसा नही हुआ …. यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी …

यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था … मोहनदास करमचन्द के अनुसार l

नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l

पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे …

उन्होंने फिर से मांग की … की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l

1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l

2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए …. कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए….

2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो … (NH – 1)

3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …

4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)

5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l

30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा l

तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l

हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो …. जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l

यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?

किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?

उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाती और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?

घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ …. जाने कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताड़ित किया गया l

परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l

10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए l

सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे … फिर कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ….

सवाल उठता है की … क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी वध होने वाला है ?

जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की… 35 तारीखें पडीं l

अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित कियाl पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34 सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले … सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे “”

गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी। नाथूराम गोडसे ने न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।

2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।

3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।

4. मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।

5. 1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।

6. गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।

7. गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।

8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।

10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।

11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।

12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।

14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।

16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।

उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर दिया।

न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-

“नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।”

तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?

प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने तो गोली नहीं मारी थी … उन्हें क्यों मृत्युदंड दिया गया ?

नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में कहा था…

यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ

– पंडित नाथूराम गोडसे

आशा है कि लोग पंडित नाथूराम को समझे व् जानें। प्रणाम हुतात्मा को।

भारत माता की जय

“तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें!”

अगर आप नाथूराम गोडसे के समर्थक है तो इस पोस्ट को और लोगो तक भी पहुँचाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक सच्चाई पहुँचे। निश्चित ही एक दिन सत्य की विजय होगी।

।।जय श्री राम।।

Monday, 13 May 2019

अगर गोडसे आज़ाद भारत का पहला हिन्दू आतंकी था,तो हिंदुस्तान का बटवारा करनेवाले क्या देश भक्त थे, ?क्या मुस्लिम लीग पार्टी कोंग्रेस से बड़ी पार्टी थी,? मुस्लिम लीग पार्टी ने महम द अली जिन्ना द्वारा देश का बटवारा कराने में पूर्ण भूमिका निभाई थी,ऐसी मुस्लिम लीग पार्टी आज भी देश का बटवारा कराने के लिए देश में रखी गई है? कमला हसन जवाब देंगे? देश आज़ाद हुआ तब से आज तक देश की राजकीय पार्टियों ने देश की जनता को लुटा है,जनता से विश्वासघात किया है, जनता लुटाती आई है,लुटाती रही है समाज सेवा,देश सेवा करने वाले कार्य कर्ता,नेता कभी गरीब नहीं हुवे,मगर धनिक होते रहे हे,नाम समाज सेवा का,देश सेवा का , और काम करने का जेब,झोली भरने का,मध्य युगीन भारत में लुटेरे थे,जो लूट ने का काम करते थे,वर्तमान समय में तरीका बदला गया है, लुटेरों ने देश सेवा, समाज सेवा का लेबल लगा लिया है,मगर काम लूटने का करते है,हिन्दू अगर आतंकी होते तो आज का अफगानिस्तान जो कभी हिंदुस्तान का भाग गांधार के नाम से जाना जाता था वहा कभी मुस्लिम धर्म को पनाह नहीं मिलती और यह प्रदेश मुस्लिम धर्म वाला नहीं बनता,इतिहास को पढ़ो समझो बाद में कॉमेंट करे,हिन्दू धर्म में कहीं ऐसा नहीं लिखा है कि अन्य धर्म वालो को दरा के जोर जुल्म से हिन्दू बनाओ, देश के बटवारा कराने वाले अच्छी तरह जानते थे कि धर्म के नाम बटवारा हुआ है,हिन्दू धर्म ने कभी देश का बटवारा हो ऐसी बाते नहीं की है,देश का बटवारा का खल नायक मह मद अली जिन्ना ने देश का बटवारा करवाया वजह मुस्लिम हिन्दुओं के साथ नहीं रह सकते,धर्म के नाम बटवारा हुआ पाकिस्तान भारत देश बने,नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या कि वह घटना का सत्य सन१८८५ से सन १९६९ की कोंग्रेस को रखना चाहिए,सन १९६९ से  कोंग्रेस अस्तित्व में हे वो पक्ष कोंग्रेस प्राइवेट कंपनी हे जिस की बागडोर गांधी परिवार यानी इंडिराजी के वारिस दारो के पास है, हिन्दू तो सिन्धु नदी जैसा हे नदी मानव समाज,पशु,पंखी सभी का लालन पालन करती है,पानी में अगर तेरना आता ना हो और डूब जाने से जान चली जाए तो नदी को दोष देना गलत है बस वैसा ही हिन्दू हे, हिन्दू धर्म की रक्षा करनेवाले हमारे पूर्वज राणा प्रताप,शिवाजी, बापा रावल क्या हिन्दू आतंकी थे,ये हमारे पूर्वज ना होते तो कमल हसन आपका नाम कमरूदीन होता और किसी मस्जिद में नमाज पढ़ते होते,दोगले हिन्दुओं ने हिन्दू धर्म को बदनाम किया है ना जाने इस देश में कितने दोगले हिन्दू भरे हुवे हे जो आए दिन हिन्दू धर्म को बदनाम करते रहते हे,आठवीं सदी में हमारे पूर्वज बापा रावल ना होते तो यह देश आठवीं सदी में मुस्लिम बन गया होता,अच्छी तरह से इतिहास पढ़े समझें बाद में कॉमेंट करे,दोगले हिन्दुओं समझ लो और जन लो हिन्दू धर्म कभी आतंकी नहीं था,नहीं है, और कभी आतंकी नहीं बनेगा,हिन्दू धर्म का सूत्र हे जियो और जीने दो,दोगला हिन्दू कमल हसन की विचार धारा देखे, गांधीजी का हत्यारा नाथूराम गोडसे हिन्दू आतंकी था,इसका मतलब यह हुआ कि देश में जितनी भी हत्याएं होती है हत्या करने वाला आतंकी है,कोई हत्या का आरोपी मुस्लिम हे तो मुस्लिम आतंकी कहलाएगा,हिन्दू हत्यारा होगा तो हिन्दू आतंकी कहलाएगा,इशाई होगा तो ईशाई आतंकी, शीख़ होगा तो सिख आतंकी वाह  वाह वाह कमल हसन आपकी बुद्धि को दाद देनी चाहिए,जो भी हत्यारा जिस धर्म का हो आतंकी कहलाएगा,देश का इतिहास आप जैसे दोगले हिन्दुओं ने बिगाड़ कर रख दिया है, जैसे आप की सोच ऐसा आपका दोगला पन है,

Sunday, 5 May 2019

HAL की जगह अनिल अंबानी को राफेल बनाने का ठेका क्यों दिया गया..........!!!!
चलिए विस्तार से जानते हैं
HAL की जगह अनिल अंबानी को राफेल बनाने का ठेका क्यों दिया गया.. जबकि इस कंपनी को कोई अनुभव नहीं है।”
दरअसल, ये सबसे बड़ा झूठ है जो कांग्रेस की तरफ से फैलाई जा रही है। ये झूठ कैसे है? ये आगे बताउंगा, लेकिन ये बात भी जानना जरूरी है कि 2012 में कांग्रेस पार्टी इसके मंत्रीगण मुकेश अंबानी के साथ ये सौदा कर रहे थे, उस वक्त इनकी मोरालिटी कहां गायब हो गई थी? तब ये ठीक था, लेकिन बस भाई को बदला गया तो अनर्थ हो गया? अजीब तर्क है।

अब जरा अंबानी और HAL को लेकर जो कहा जा रहा है वो समझते हैं। राफेल सौदे 7.87 अरब यूरो (करीब 59,000 करोड़ रुपये) का है। इसके साथ ‘ऑफसेट’ कॉन्ट्रैक्ट भी है। इसका मतलब ये है कि संबंधित कंपनी को सौदे की राशि का एक निश्चित प्रतिशत हिंदुस्तान में लगाना पड़ेगा। इस समझौते में 50 प्रतिशत ऑफसेट बाध्यता है, जो देश में अब तक का सबसे बड़ा ‘ऑफसेट’ अनुबंध है। ‘ऑफसेट’ समझौते का मुख्य बिंदु यह है कि इसका 74 प्रतिशत भारत में आयात किया जाएगा। इसका मतलब है कि करीब 22,000 करोड़ रुपये का सीधा कारोबार होगा। इसमें टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की भी बात है, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि DRDO शामिल है। ये सब इसलिए ताकि मेक इन इंडिया को बढावा मिल सके। (ये सब यूपीए के मसौदे में नहीं था)

भारत मे राफेल की सिर्फ असेंबली होगी
एक बात समझने की ये है कि किसी भी विमान को बनाने में कई कंपनियों की हिस्सेदारी होती है। एक छत के नीचे सब कुछ नहीं बनता। इसके अलग-अलग कोंपोनेंट्स को अलग-अलग कंपनियों से लिया जाता है। लाजमी है कि राफेल सौदे में अन्य कंपनियां भी हैं, जिनमें फ्रांस की एमबीडीए तथा थेल्स शामिल हैं। इनके अलावा सैफरॉन भी ऑफसेट बाध्यता का हिस्सा है। दोनों कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इन ऑफसेट बाध्यताओं के लागू करने में संयुक्त उद्यम दस्सो रिलायंस एयरोस्पेस प्रमुख कंपनी होगी।

मतलब ये कि राफेल फाइटर प्लेन को बनाने के लिए रिलायंस को नहीं चुना गया है। दस्सो के साथ जो ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनी है वो नई कंपनी राफेल फाइटर जेट के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार करेगी। मतलब ये कि ये ज्वाइंट वेंचर कंपनी हिंदुस्तान में राफेल फाइटर जेट को सिर्फ एसेंबल करेगी। वैसे भी रिलायंस डिफेंस का पहले से थेल्स कंपनी के साथ एक ज्वाइंट वेंचर है जिसे राफेल के लिए राडार और इलेक्ट्रोनिक्स की सप्लाई के लिए चुना गया था। इसलिए ये कहना कि रिलायंस को कोई अनुभव नहीं है.. ये पूरी तरह बकवास है।
HAL को इस मसौदे से क्यों बाहर रखा गया?......!!!

इस सवाल को उठाने का हक कांग्रेस 1991 में ही खो चुकी है, जब उसने देश में उदारवादी नीतियों को लागू किया था। जिसके लिए ये लोग (नरसिम्हा राव की जगह) मनमोहन सिंह की पूजा करते हैं। HAL एक पब्लिक सेक्टर युनिट है। हिंदुस्तान की अकेली कंपनी जिस पर लड़ाकू विमान बनाने की जिम्मेदारी थी। लेकिन सवाल ये है कि 1940 से अब तक इस सरकारी कंपनी ने भारत को क्या दिया? क्या हिंदुस्तान की वायुसेना HAL के बनाए विमानों का इस्तेमाल कर रही है? दलाली और कमाई के चक्कर में कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने रक्षा के क्षेत्र में कभी आत्मनिर्भर होने की कोशिश ही नहीं की। हम मंगल पर यान भेज पाने में सक्षम हैं लेकिन विश्वस्तरीय विमान तो दूर .. आर्मी के लिए हम एक अच्छी राय़फल नहीं बना पा रहे हैं।

ये जानबूझ कर किया गया। क्योंकि देश की रक्षा के नाम पर इन लोगों ने दलाली और भ्रष्टाचार का एक अभेद्य नेटवर्क तैयार कर रखा है। अब ये टूट रहा है तो कांग्रेस पार्टी को दर्द हो रहा है।

मोदी सरकार जब से आई है, तब से डिफेंस मार्केट को खोलने की शुरुआत हुई है। ये एक अच्छी शुरुआत है। हथियार और विमान बनाना कोई मैकडोनॉल्ड की टिकिया या कोकाकोला की शिकंजी तो है नहीं...। इसमें काफी कैपिटल की जरूरत होती है। सरकार ने हथियार के बाजार को खोला तो रिलायंस, टाटा, L&T, गोदरेज जैसे बड़ी कंपनियों ने इस क्षेत्र में निवेश करना शुरु किया। विदेशी कंपनियों से ज्वाइंट वेंचर शुरु किया। इस बैकग्राउंड में राफेल का मसौदा होता है तो इसकी ऑफसेट कांट्रैक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए किसी कंपनी की तो जरूरत पडेगी ही।

HAL पहले के दिए हुए टारगेट को पूरा नहीं कर पा रही है तो ये लाजमी है कि किसी प्राइवेट कंपनी को ये काम दिया जाए। इसके लिए रिलायंस को चुना गया तो कौन सा पहाड़ टूट गया। जब काग्रेस पार्टी भी 2012 में मुकेश अंबानी के साथ यही काम करने में लगी थी.. लेकिन वो सौदा रास्ते में ही लटक गया इसलिए कांग्रेस इस काम को पूरा नहीं कर पाई। अब यही काम मोदी सरकार कर रही तो राहुल गांधी घोटाला.. घोटाला चिल्ला रहे हैं।  

याद रखने वाली बात ये है कि लड़ाकू विमान राफेल की ख़रीददारी एक विशेष परिदृश्य में की गई, जब भारत का चीन और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनावपूर्ण होने लगे थे। बॉर्डर पर लगातार गोलीबारी और पठानकोट व उरी जैसे हमलों के बाद देश चिंता बढ़ने लगी थी। चीन के साथ डोकलाम में सेना आमने सामने थी। किसी भी वक्त मामला बिगड़ने का डर सताने लगा था। ऐसे नाजुक हालात में भारत को एक विश्वस्तरीय फाइटर प्लेन की जरूरत थी। ऐसा माहौल में जो डील मोदी सरकार ने की उसकी तारीफ होनी चाहिए न कि बिना जानकारी और सबूत के राजनीतिक फायदे के लिए तमाशा करना चाहिए। ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से ज़ुडा है, फ्रांस जैसे मददगार साथी देश के साथ रिश्ते से जुड़ा है..। ऐसे में विपक्ष का भी ये दायित्व है कि वो जिम्मेवार बने। वैसे देश की जनता काफी समझदार है..। कौन चोर है और कौन ईमानदार.. वो भलीभांति जानती है।