"मोदी जैसे बोरिंग बुड्ढे को राजनीति छोड़कर हिमालय में हड्डियाँ गलानी चाहिये" ... जिग्नाश मेवानी
भई ग़लत ही क्या कहा? बोरिंग बुड्ढा तो है ही। ज़रा पिग्विजय को देखो, अपने लड़के से पहले अपना फिर से ब्याह रचा लिया, आधी उम्र की महिला के साथ। सबक लेना है तो नारयौन दत्त तिवारी से लो, जो पड़दादा बनने की उम्र में बाप बन गए। अरे अभिसार मनु सिंघवी को ही देख लिया होता। और नेहरू जी तो ख़ैर इन सबके बाप लगते हैं। क्या जलवे हैं इन रंगीले बुड्ढों के। और एक हैं मोदी जी। सारी उम्र निकाल दी, ब्याहता बीवी भी लड़कपन में ही त्याग दी, जीवन देश की सेवा में अर्पण कर दिया। कोरे ही घूम रहे हैं।
भगनाश उह जिग्नाश भाई, जिस उम्र में आप और आपके दायें तरफ़ लटके हार्पिक पे तेल, पचासियों वेश्याओं के साथ सीडी बना रहे हैं, वे तो उस उम्र में घरबार छोड़कर हिमालय में हड्डियां गला रहे थे। जिस उम्र में आपके ऊपर लटके हुए पप्पू जी बैंकाक जाकर दो दो महीने अज्ञातवास में गुलबदनों के साथ गुलछर्रे उड़ाते हैं, उस उम्र में वे संघ के प्रचारक बन कर दो जोड़ी कपड़ों और एक झोले के साथ देशाटन कर रहे थे। अब इसे बोरिंग न कहा जाय तो और क्या?
मगर असल में वामपंथी इतिहास पढ़ पढ़कर आपको अपनी मूल संस्कृति का कुछ भी ज्ञान बाक़ी नहीं। एक ऋषि हुए हैं दधीचि, जिनकी हड्डियों से वह अस्त्र बना जिससे वृतासुर नामक दैत्य का वध हुआ था। आज ढोंग्रेस व उसके अन्य घटक वह दैत्यदल है जो देश को निगल रहा है। इसी दैत्य के अंत के लिए ये हिमालय में गली हुई हड्डियां काम आ रही हैं। तुम और तुम जैसे सब राक्षसों का अंत इसी अस्त्र से होगा।
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