श्री रामानंद सागर जी द्वारा प्रस्तुत रामायण जी का आज दिनांक 28 मार्च से पुनः आरंभ हुआ।
रामायण के हर क्षण में कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।
1. जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है उस समय कुछ मांगने से उसकी इच्छा पूर्ण होती है - जैसे राजा दशरथ को संतान प्राप्ति
2. घर मे हवन यज्ञ आदि करवाना चाहिए
3. किसी के समक्ष कुछ मांगने के लिए भिक्षुक बन जाना चाहिए - जैसे राजा दशरथ ऋषि से यज्ञ करवाने के लिए भिक्षुक बने थे
4.विद्या आरंभ का श्रेष्ठ मुहूर्त वसंत पंचमी होता है
5. दिनचर्या शुरू करने से पूर्व स्नान आदि करके ईश्वर को फिर पिता को प्रणाम करना चाहिए
6. राजा दशरथ ने विद्या प्राप्ति के लिए पुत्रो को गुरुकुल भेज था अथार्थ पुत्रो को योग्य बनाने के लिए स्वयं से दूर भी करना पड़े तो करना चाहिए
7. संतान की याद में माँ बाप की भूख भी मर जाती है
8.बच्चो को हर परिस्थिति में जीने की शिक्षा देनी चाहिए क्या पता कब कैसा समय आ जाये
9.भिक्षुक को हमेशा भिक्षा अपरिचित से लेना चाहिए, अपनो से नही।
1) योग हमारे जीवन में मन को एकाग्रचित्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है हम योगी होकर ही अपने अन्तर्मन को शरीर से बाहर रखकर अपने विकारो और अहंकार का आंकलन कर सकते है।
2) जब हम आराधना करते हैं तो पूरे चित्त से करे जैसे श्री राम शिव जी का अभिषेक कर रहे थे,,,,वे इतने लीन हो गये कि भगवान स्वयं भक्त की भक्ति में नटराज हो गये,,मनुष्य का नही पता परंतु भगवान सब देख रहे हैं ।
3) विश्वामित्र जैसे ऋषि उस काल के वैज्ञानिक अनुसंधान करते थे उन्होने कहा कि तप के बीच क्रोध वर्जित है इसलिए राक्षसों को श्राप नही दिया जा सकता,,अर्थात बिना किसी क्रोध और मन को विचलित किये बिना हमारे वैज्ञानिक भी कोरोना की दवाई ढूँढ सकते हैं । क्रोध तभी करे जब आवश्यकता हो जैसे विश्वामित्र जी ने दशरथ जी को उनका वचन याद दिलाने हेतु किया ।
4) एक गुरु विश्वामित्र को ऋषि वशिष्ठ की शिक्षा पर पूरा भरोसा है क्योकि उन्होने शिष्यो को दिए हुये ज्ञान का अंधविश्वास या रटन विद्या से नही अपितु स्वविवेक से प्रयोग करने को कहा।
5) तीन कर्तव्य महत्वपूर्ण बताये गुरु वशिष्ठ ने देवताओ के प्रति अर्थात हमारी आत्मा देवस्वरूप ,माता पिता के प्रति- इसलिये विश्वामित्र जी ने श्री राम को दशरथ जी से माँगा,,और गुरु के प्रति,,,,गुरु ने दीक्षा में परहित मांगा जो संसार की सबसे बड़ी गुरु दीक्षा है ।
हम इस रामायण से काफी कुछ सीख सकते हैं यदि चित्त से अपने जीवन में उतार ली जाये तो ✍
उक्त ब्लॉग में कुछ बातें श्री रजनीश दुबे जी की भी है। 🙏🏻
रामायण के हर क्षण में कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।
1. जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है उस समय कुछ मांगने से उसकी इच्छा पूर्ण होती है - जैसे राजा दशरथ को संतान प्राप्ति
2. घर मे हवन यज्ञ आदि करवाना चाहिए
3. किसी के समक्ष कुछ मांगने के लिए भिक्षुक बन जाना चाहिए - जैसे राजा दशरथ ऋषि से यज्ञ करवाने के लिए भिक्षुक बने थे
4.विद्या आरंभ का श्रेष्ठ मुहूर्त वसंत पंचमी होता है
5. दिनचर्या शुरू करने से पूर्व स्नान आदि करके ईश्वर को फिर पिता को प्रणाम करना चाहिए
6. राजा दशरथ ने विद्या प्राप्ति के लिए पुत्रो को गुरुकुल भेज था अथार्थ पुत्रो को योग्य बनाने के लिए स्वयं से दूर भी करना पड़े तो करना चाहिए
7. संतान की याद में माँ बाप की भूख भी मर जाती है
8.बच्चो को हर परिस्थिति में जीने की शिक्षा देनी चाहिए क्या पता कब कैसा समय आ जाये
9.भिक्षुक को हमेशा भिक्षा अपरिचित से लेना चाहिए, अपनो से नही।
रामायण के दूसरे कथांश से सीखने वाली बातें :-
1) योग हमारे जीवन में मन को एकाग्रचित्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है हम योगी होकर ही अपने अन्तर्मन को शरीर से बाहर रखकर अपने विकारो और अहंकार का आंकलन कर सकते है।
2) जब हम आराधना करते हैं तो पूरे चित्त से करे जैसे श्री राम शिव जी का अभिषेक कर रहे थे,,,,वे इतने लीन हो गये कि भगवान स्वयं भक्त की भक्ति में नटराज हो गये,,मनुष्य का नही पता परंतु भगवान सब देख रहे हैं ।
3) विश्वामित्र जैसे ऋषि उस काल के वैज्ञानिक अनुसंधान करते थे उन्होने कहा कि तप के बीच क्रोध वर्जित है इसलिए राक्षसों को श्राप नही दिया जा सकता,,अर्थात बिना किसी क्रोध और मन को विचलित किये बिना हमारे वैज्ञानिक भी कोरोना की दवाई ढूँढ सकते हैं । क्रोध तभी करे जब आवश्यकता हो जैसे विश्वामित्र जी ने दशरथ जी को उनका वचन याद दिलाने हेतु किया ।
4) एक गुरु विश्वामित्र को ऋषि वशिष्ठ की शिक्षा पर पूरा भरोसा है क्योकि उन्होने शिष्यो को दिए हुये ज्ञान का अंधविश्वास या रटन विद्या से नही अपितु स्वविवेक से प्रयोग करने को कहा।
5) तीन कर्तव्य महत्वपूर्ण बताये गुरु वशिष्ठ ने देवताओ के प्रति अर्थात हमारी आत्मा देवस्वरूप ,माता पिता के प्रति- इसलिये विश्वामित्र जी ने श्री राम को दशरथ जी से माँगा,,और गुरु के प्रति,,,,गुरु ने दीक्षा में परहित मांगा जो संसार की सबसे बड़ी गुरु दीक्षा है ।
हम इस रामायण से काफी कुछ सीख सकते हैं यदि चित्त से अपने जीवन में उतार ली जाये तो ✍
उक्त ब्लॉग में कुछ बातें श्री रजनीश दुबे जी की भी है। 🙏🏻
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